अभी उत्तर भारत के कई राज्यों में शीतलहर का प्रकोप है. इससे ठंड बढ़ गई है. लिहाजा फसलों पर पाले का खतरा है. रबी सीजन की कई फसलें हैं जो पाले के प्रकोप से प्रभावित होती हैं. इन फसलों में गेहू, चना से लेकर प्याज, लहसुन आदि शामिल हैं. इसलिए फसलों को पाले से बचाना जरूरी होता है.
पाले से बचाव के साथ किसानों को इस बात पर भी फोकस करना चाहिए कि खेती में कुछ नया प्रयोग करें. इस प्रयोग में इतना काम कर सकते हैं कि उन फसलों का चुनाव करें जो पाले से प्रभावित नहीं होतीं. या कम प्रभावित होती है. ऐसी फसलें किसानों को फायदा पहुंचाएंगी.
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन क्षेत्रों में पाला पड़ने की आशंका अधिक हो, वहां चुकंदर, गाजर, गेहूं, मूली, जौ इत्यादि फसलें बोने से पाले का प्रभाव कम पड़ेगा. इन फसलों की और भी कई खासियतें हैं. ये फसलें कम दिनों में तैयार हो जाती हैं और किसानों की आमदनी बढ़ा देती है.
ऐसे में किसान अगर इन फसलों की खेती करें तो उन्हें डबल मुनाफा होगा. पहला तो ये कि पाले से फसलें प्रभावित नहीं होंगी. इससे किसानों का दवा का खर्च बचेगा. लागत घटेगी और कमाई बढ़ेगी. इस तरह किसान डबल मुनाफे का सौदा कर सकते हैं.
कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि पाले से प्रभावित होने वाली फसलों की अवरोधी किस्मों की बुवाई करने से पाले से बचा जा सकता है. जैसे आलू की कुफरी शीतमान, सिंदूरी और कुफरी देवा, मटर की बीएल-1, बीएल-3 आदि प्रजातियों की बुवाई करने से पाले से होने वाली क्षति से बचा जा सकता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि किसान इन पाला रोधी फसलों की खेती कर नुकसान से बच सकते हैं. इसके अलावा पाले से फसलों को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीके भी अपना सकते हैं. इसमें एक विधि खेत की मिट्टी में बालू मिलाना भी है. बालू मिलाने से खेत का तापमान बढ़ जाता है और पाले से मुक्ति मिलती है.
फसलों को पाले से बचाने के लिए किसान समय पर फसल बोकर इसके खतरे को कम कर सकते हैं. पाला अधिकतर फसलों में फूल आने की अवस्था पर पड़ता है. इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में फसल की बुवाई समय पूर्व कर देनी चाहिए जिससे फसलों को पाले से बचाया जा सके. इसके अलावा, फलदार वृक्षों के पास तालाब और जलाशय बनाने से फल वृक्षों पर पाले का असर कम होता है.
रासायनिक तरीके की बात करें तो बारानी फसल में जब पाला पड़ने की आशंका हो, तो पाले वाले दिनों में फसल पर व्यावसायिक गंधक के तेजाब का 0.1 प्रतिशत (10 मिली रसायन 100 लीटर पानी में) घोल का छिड़काव इस प्रकार करें जिससे पौधे पूरी तरह से भीग जाएं. पाले से बचाव के अतिरिक्त इसमें पौधों में रोग से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है फसल जल्द पकती है.