अब खेती होगी आसान! MP की हर विधानसभा में खुलेगी कृषि यंत्र किराये की दुकान

अब खेती होगी आसान! MP की हर विधानसभा में खुलेगी कृषि यंत्र किराये की दुकान

मध्य प्रदेश सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत बड़ा फैसला लिया है. अब हर विधानसभा में कृषि यंत्र किराये की दुकान खोली जाएगी.वर्तमान में 5,260 केंद्र संचालित हैं और हर साल 1,060 नए केंद्र खुलेंगे, जिससे छोटे किसानों को कम खर्च में आधुनिक कृषि मशीनों का लाभ मिलेगा.

धर्मेंद्र सिंह
  • Bhopal ,
  • Jul 23, 2026,
  • Updated Jul 23, 2026, 8:10 AM IST

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राज्य की प्रत्येक विधानसभा में कम से कम एक "कृषि यंत्र किराये की दुकान" अनिवार्य रूप से खोली जाएगी.इस पहल का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को बिना महंगे कृषि यंत्र खरीदे आधुनिक तकनीक का लाभ दिलाना है.

सरकार ने इस योजना को कृषक कल्याण 

वर्ष-2026 की प्रमुख पहल के रूप में शामिल किया है.वर्तमान में प्रदेश में 5,260 कृषि यंत्र किराया केंद्र संचालित हैं, जबकि आने वाले वर्षों में हर साल 1,060 नए कृषि यंत्र किराये की दुकानें स्थापित की जाएंगी.

छोटे किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

महंगे कृषि यंत्र खरीदना छोटे किसानों के लिए अक्सर संभव नहीं होता. नई व्यवस्था के तहत किसान न्यूनतम सेवा शुल्क देकर ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, प्लाऊ, लेवलर, ग्रेडर, हाइड्रोलिक ट्रॉली और अन्य आधुनिक कृषि उपकरण किराये पर ले सकेंगे. इससे खेती की लागत कम होगी, समय की बचत होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी.

कृषि यंत्र निर्माण में आत्मनिर्भर बन रहा मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश अब कृषि यंत्र निर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. विदिशा जिला इस दिशा में एक मॉडल बनकर उभरा है, जहां करीब 150 कृषि उपकरण निर्माण इकाइयाँ संचालित हैं। यहां ग्रेडर, लेवलर, हाइड्रोलिक ट्रॉली, कल्टीवेटर और प्लाऊ जैसे उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण तैयार किए जा रहे हैं.

विदिशा में बने कृषि यंत्रों की मांग सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि मेडागास्कर, नाइजीरिया, सूडान, यूगांडा, घाना, अल्जीरिया, ग्वाटेमाला, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश सहित कई देशों में भी है.

स्थानीय उद्योगों को मिल रही नई पहचान

उषा एग्रो के संचालक मानस गुप्ता बताते हैं कि उनके परिवार ने वर्ष 1993 में इस कारोबार की शुरुआत की थी. आज उनके कृषि यंत्र 10 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं. उनका कहना है कि कंपनी का करीब दो-तिहाई कारोबार भारत में और एक-तिहाई विदेशों में होता है. कंपनी का वार्षिक कारोबार लगभग 4 करोड़ रुपये है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की नीतियों और निर्यात प्रोत्साहन से कारोबार को नई गति मिली है.

युवा उद्यमियों के लिए भी अवसर

संजय उद्योग के संचालक विष्णु शर्मा ने बताया कि उन्होंने कोरोना काल में वर्ष 2020 में कृषि उपकरण निर्माण का काम शुरू किया था. किसानों से अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने सरकार से इस क्षेत्र में नए उद्यमियों के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं बढ़ाने की मांग की.

वहीं किसान इंडस्ट्रीज और एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी जैसी इकाइयां भी खेती के हर चरण—जुताई, बुवाई, रोपाई और कटाई—के लिए आधुनिक कृषि उपकरण तैयार कर रही हैं. इन कंपनियों का कारोबार मध्य प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों तक फैल चुका है.

कृषि मशीनीकरण को मिलेगी रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक विधानसभा में कृषि यंत्र किराये की दुकान खुलने से किसानों को आधुनिक तकनीक तक आसान पहुंच मिलेगी. इससे खेती की लागत कम होगी, श्रम की बचत होगी और कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ प्रदेश में कृषि मशीनीकरण को नई गति मिलेगी.

 

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