
केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है. सरकार ने कहा है कि गेहूं का निर्यात अभी भी बैन रहेगा, लेकिन जरूरत को देखते हुए 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं विदेश भेजने की सीमित अनुमति दी जाएगी. यह फैसला देश में खाद्य सुरक्षा और बाजार में उपलब्धता को ध्यान में रखकर लिया गया है. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने मंगलवार 24 फरवरी को इसे लेकर नोटिफिकेशन जारी की है.
DGFT की नोटिफिकेशन के मुताबिक, गेहूं से जुड़े दोनों प्रमुख श्रेणियों ITC (HS) कोड 10011900 और 10019910 में निर्यात नीति में कोई बड़ी छूट नहीं दी गई है. यानी व्यापारी अपनी मर्जी से गेहूं का निर्यात नहीं कर सकेंगे. सरकार ने सिर्फ एक विशेष प्रावधान के तहत तय मात्रा में निर्यात की इजाजत देने का फैसला लिया है.
इस नोटिफिकेशन में यह भी साफ किया गया है कि 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं का निर्यात खुले बाजार के जरिए नहीं होगा. इसके लिए सरकार अलग से सार्वजनिक सूचना जारी करेगी. इसमें यह बताया जाएगा कि निर्यात कब, कैसे और किन शर्तों पर किया जाएगा. इससे सरकार को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि देश के भीतर गेहूं की आपूर्ति पर कोई असर न पड़े.
सरकार ने पहले से लागू नियमों को भी बरकरार रखा है. मई 2022 में जारी आदेश के अनुसार, अगर कोई देश भारत से अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए गेहूं की मांग करता है और केंद्र सरकार इसकी अनुमति देती है तो तय सीमा से अधिक मात्रा में भी निर्यात किया जा सकता है. हालांकि, यह व्यवस्था केवल सरकार-से-सरकार के स्तर पर ही लागू होगी.
मालूम हो कि इससे पहले केंद्र ने 13 फरवरी को बड़ा फैसला लेते हुए 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उत्पाद के निर्यात को मंजूरी दी थी. साथ ही अतिरिक्त 5 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात को भी मंजूरी दी थी. सरकार ने गेहूं निर्यात को मंजूरी देन की वजह देश में पर्याप्त भंडारण और घरेलू बाजार में इसकी घटती डिमांड और गिरते दामों को बताया था.
सरकार ने तर्क दिया कि निर्यात से घरेलू डिमांड बढ़ेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे. वहीं, सरकार चालू रबी सीजन में गेहूं की रिकॉर्ड बुवाई और रिकॉर्ड उत्पादन को लेकर भी आश्वस्त है. हालांकि, सरकार के सीमित निर्यात को मंजूरी देने के फैसले के बाद भी प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में गेहूं के दाम लगातार गिर रहे हैं.