Wheat Export: उत्पादन में र‍िकॉर्ड बना रहे गेहूं का क्यों बैन है एक्सपोर्ट, क‍िसानों को हुए नुकसान की कौन करेगा भरपाई?

Wheat Export: उत्पादन में र‍िकॉर्ड बना रहे गेहूं का क्यों बैन है एक्सपोर्ट, क‍िसानों को हुए नुकसान की कौन करेगा भरपाई?

Wheat Export Ban: भारत में हर साल रिकॉर्ड गेहूं का उत्‍पादन हो रहा है. लेकिन बावजूद इसके मई 2022 से इसके एक्‍सपोर्ट पर बैन लगा हुआ है. सरकार अनाज भंडार भरे होने के बाद भी एक्‍सपोर्ट को मंजूरी नहीं दे रही है, जिससे किसानों को सीधे तौर पर घाटा हो रहा है. पढ़ि‍ए पूरी रिपोर्ट...

Wheat Export Ban Wheat Export Ban
प्रतीक जैन
  • Noida,
  • Jan 15, 2026,
  • Updated Jan 15, 2026, 5:13 PM IST

भारत में बीते कुछ वर्षों से गेहूं का उत्पादन र‍िकॉर्ड बना रहा है. जब भी सरकार उत्पादन के नए आंकड़े र‍िलीज करती है, तब उत्पादन बढ़ा ही रहता है. इसके बावजूद मई 2022 से ही गेहूं के निर्यात पर लगी रोक अब तक जारी है. एक्सपोर्ट बैन होने की वजह से सीधे तौर पर क‍िसानों को नुकसान हो रहा है. उन्हें अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी से अध‍िक कीमत म‍िल रही है, लेक‍िन व‍िशेषज्ञों का कहना है क‍ि अगर एक्सपोर्ट बैन नहीं होता तो क‍िसानों को कहीं ज्यादा कीमत म‍िल रही होती. सवाल यह है क‍ि क‍िसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा. सवाल यह भी है क‍ि जब उत्पादन र‍िकॉर्ड बना रहा है और 80 करोड़ लोगों को मुफ्त में राशन द‍िया जा रहा है तो फ‍िर एक्सपोर्ट बैन करके क‍िसानों की कीमत पर क‍िसे राहत दी जा रही है? 

फिर नए रिकॉर्ड की ओर गेहूं उत्‍पादन

इसका नतीजा यह हो रहा है कि घरेलू बाजार में अतिरिक्त सप्लाई का दबाव बन रहा है और किसानों को MSP से ऊपर मजबूत भाव मिलने का मौका नहीं मिल पा रहा है. साथ ही मंडियों में सालाना स्‍तर पर गेहूं के भाव में गिरावट का दौर जारी है. इस बीच, एक बार फिर देश में चालू रबी सीजन 2025-26 में गेहूं उत्पादन नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ता दिख रहा है.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बेहतर फसल स्थिति और रिकॉर्ड रकबे के चलते इस बार गेहूं उत्पादन पिछले साल के 1179.4 लाख टन के स्तर को पार कर सकता है और अनुकूल हालात बने रहने पर यह 1200 लाख टन के करीब पहुंचने का अनुमान है. 

2021-22 में उत्पादन और MSP

रबी सीजन 2021-22 में देश का गेहूं उत्पादन करीब 107-108 मिलियन टन था. उस साल MSP 2015 रुपये प्रति क्विंटल तय था. वहीं, ऑल इंडिया स्तर पर गेहूं का मॉडल प्राइस MSP के आसपास ही घूमता रहा यानी खुले बाजार ने किसानों को कोई खास प्रीमियम नहीं दिया.

2022-23 में एक्सपोर्ट बैन लगा और भाव सिमटे

बाद में मई 2022 में सरकार ने गेहूं के निर्यात पर बैन लगाया और उसी फसल वर्ष में उत्पादन बढ़कर करीब 110 मिलियन टन तक पहुंच गया. इस दौरान MSP बढ़ाकर 2125 रुपये किया गया, लेकिन ऑल इंडिया मॉडल प्राइस करीब 2138 रुपये प्रति क्विंटल ही रहा. यानी MSP बढ़ने के बावजूद बाजार भाव वहीं टिके रहे.

2023-24 में रिकॉर्ड उत्पादन फिर भी नहीं बदली स्थित‍ि

आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में गेहूं उत्पादन एक और रिकॉर्ड के साथ 112-113 मिलियन टन के आसपास पहुंचा, जबकि‍ MSP बढ़कर 2275 रुपये प्रति क्विंटल हुआ. इसके बावजूद ऑल इंडिया मॉडल प्राइस करीब 2258 रुपये रहा, यानी MSP से नीचे. यह साफ संकेत था कि घरेलू बाजार अतिरिक्त गेहूं को खपाने में संघर्ष कर रहा है.

2024-25 में बाजार MSP के इर्द-गिर्द ही सिमटा

2024-25 में देश का गेहूं उत्पादन 1179.4 लाख टन तक पहुंच गया, जिसे अब तक तक का सबसे बड़ा उत्पादन माना जा रहा है. इस सीजन के लिए MSP 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया. ऑल इंडिया स्तर पर 2024 के दौरान गेहूं का मॉडल प्राइस भी औसतन 2425 रुपये के आसपास ही रहा और 2025 में मॉडल प्राइस करीब 2518 रुपये दर्ज किया गया, जोकि थोड़ा बेहतर है, लेकिन बहुत प्रीमियम प्राइस भी नहीं है. अब रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए 2585 रुपये MSP घोषित होने के बाद नई फसल की आवक से पहले ही बाजार भाव दबाव में आते दिखने लगे हैं. 

खपत से ज्यादा उत्पादन, फिर भी निर्यात बंद

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में गेहूं की सालाना खपत करीब 1050 लाख टन के करीब है. यानी हर साल कई लाख टन अतिरिक्त उत्पादन बाजार में दबाव बनाता है. ऐसे में अगर निर्यात खुला होता तो यह अतिरिक्त गेहूं अंतरराष्ट्रीय बाजार में जा सकता था और घरेलू दामों को और सहारा मिलता. एक तरफ सरकार MSP बढ़ाकर रिकॉर्ड बना रही है, दूसरी तरफ खुले बाजार में वही MSP किसानों के लिए सीलिंग बनता जा रहा है.

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