धान खरीद में तेलंगाना ने बनाया नया रिकॉर्ड, किसानों के खाते में पहुंचे इतने करोड़

धान खरीद में तेलंगाना ने बनाया नया रिकॉर्ड, किसानों के खाते में पहुंचे इतने करोड़

तेलंगाना सरकार ने खरीफ सीजन 2025-26 में नया रिकॉर्ड बनाया है. इस बार राज्य सरकार ने न सिर्फ रिकॉर्ड मात्रा में धान की खरीद की है,  बल्कि समय पर किसानों को भुगतान और बोनस भी दिया है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 15, 2026,
  • Updated Jan 15, 2026, 12:26 PM IST

देश के लगभग सभी राज्यों में खरीफ धान की खरीद अब समाप्त हो गई है. इस बीच, तेलंगाना ने खरीफ सीजन के खत्म होते ही धान खरीद में एक नया मिसाल कायम किया है. इस बार राज्य सरकार ने न सिर्फ रिकॉर्ड मात्रा में धान की खरीद की है, बल्कि समय पर किसानों को भुगतान और बोनस भी दिया है. ऐसे में राज्य के लाखों किसानों के लिए यह सीजन राहत और संतोष भरा रहा है.

इतने लाख टन हुई धान की खरीद

तेलंगाना सरकार ने खरीफ सीजन 2025-26 में कुल 16,900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से रिकॉर्ड 70.82 लाख टन धान की खरीद की है. यह आंकड़ा राज्य के धान खरीदी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है. तेलंगाना के नागरिक आपूर्ति और सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि हमने 2020-21 में दर्ज 70.20 लाख टन की खरीद के रिकॉर्ड को बेहतर बनाया है.

धान खरीद इतिहास में मील का पत्थर

इसे राज्य के धान खरीद इतिहास में एक मील का पत्थर बताते हुए, उन्होंने कहा कि खरीद के आंकड़ों में 38.37 लाख टन उत्तम किस्म के चावल शामिल हैं. राज्य ने इस सीजन में लगभग 1.48 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर धान की खरीद से लगभग 14 लाख किसानों को लाभ हुआ है. सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि कुल 16,900 करोड़ रुपये के मूल्य में से हमने लगभग 16,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है.

किसानों को दिया गया बोनस

उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि सरकार ने उत्तम किस्म की फसलें उगाने वाले किसानों को बोनस के रूप में 1,425 करोड़ रुपये (500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से) का भुगतान किया है.  नागरिक आपूर्ति मंत्रालय के एक बयान में बुधवार को कहा गया कि सरकार ने राज्य में लगभग 8,500 खरीद सौदे शुरू किए हैं.

तेलंगाना में इतना रहा धान उत्पादन

इस खरीफ सीजन में तेलंगाना में कुल धान उत्पादन करीब 1.48 करोड़ टन रहा. इसके पीछे की वजह अच्छी बारिश, सिंचाई सुविधाओं और सरकारी समर्थन है. वहीं, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह खरीदी और भुगतान की व्यवस्था बनी रही, तो आने वाले वर्षों में राज्य में धान उत्पादन और किसानों की आमदनी दोनों में तेजी से बढ़ोतरी होगी.

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