हरियाणा में बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल को हुए नुकसान के बाद किसानों को बड़ी राहत मिली है. दरअसल, केंद्र सरकार ने रबी खरीद सत्र 2026-27 के लिए हरियाणा में गेहूं खरीद के नियमों में विशेष छूट देने का फैसला किया है. यह निर्णय किसानों को संकटपूर्ण बिक्री यानी कम कीमत पर मजबूरी में गेहूं बेचने से बचाने के लिए लिया गया है. जानकारी के अनुसार, हरियाणा सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने केंद्र से गेहूं की एक समान गुणवत्ता मानकों में ढील देने की मांग की थी. राज्य सरकार ने बताया था कि प्रदेश के सभी जिलों में बेमौसम बारिश के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हुई है, जिससे दानों की क्वालिटी पर असर पड़ा है.
इस मांग पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार ने पूरे हरियाणा के लिए गेहूं खरीद में कुछ शर्तों के साथ राहत देने का फैसला किया है. यह छूट रबी खरीद सत्र 2026-27 की खरीद शुरू होने की तारीख से लागू होगी.
गेहूं खरीद नियमों में दी गई छूट
- नए फैसले के अनुसार, पूरे हरियाणा में ‘चमक खो चुके’ गेहूं की सीमा को 70 प्रतिशत तक शिथिल किया गया है. यानी ऐसे गेहूं को भी सरकारी खरीद में शामिल किया जाएगा, जिसकी चमक बारिश या मौसम के असर से कम हो गई है.
- इसके अलावा ‘सिकुड़े हुए और टूटे हुए’ दानों की सीमा भी बढ़ाई गई है. पहले यह सीमा 6 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक कर दिया गया है. इससे उन किसानों को राहत मिलेगी जिनकी फसल में बारिश के कारण दाने खराब या टूट गए हैं.
- हालांकि सरकार ने कुछ शर्तें भी तय की हैं. क्षतिग्रस्त और थोड़ा क्षतिग्रस्त दानों की कुल मात्रा 6 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. यानी पूरी तरह खराब क्वालिटी वाले गेहूं की खरीद नहीं होगी.
- सरकार ने यह भी कहा है कि शिथिल मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग से रखा जाएगा और उसका रिकॉर्ड भी अलग से तैयार किया जाएगा. भंडारण के दौरान अगर इस गेहूं की क्वालिटी में और गिरावट आती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी.
- इसके साथ ही ऐसे गेहूं के स्टॉक का निपटान सबसे पहले किया जाएगा, ताकि लंबे समय तक रखने से नुकसान न हो. इस फैसले से जुड़े किसी भी वित्तीय या संचालन संबंधी असर की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की होगी.
- सरकार के इस फैसले से हरियाणा के लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है. खराब मौसम से फसल प्रभावित होने के बाद किसान चिंतित थे, लेकिन अब सरकारी खरीद में ढील मिलने से उन्हें अपनी उपज का उचित दाम मिलने का रास्ता साफ हो गया है.
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