गेहूं पर 34 बार हुआ कीटनाशक का छिड़काव, 150 करोड़ रुपये खर्च...पशुओं के खाने लायक भी नहीं बचा

गेहूं पर 34 बार हुआ कीटनाशक का छिड़काव, 150 करोड़ रुपये खर्च...पशुओं के खाने लायक भी नहीं बचा

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के ओबेदुल्लागंज वेयरहाउस में 22 हजार टन गेहूं सड़ गया. करीब 35 करोड़ रुपये का अनाज खराब हुआ और इसे बचाने में 150 करोड़ रुपये का खर्च आया. कीटनाशक छिड़काव और रखरखाव के बावजूद नुकसान रोकना संभव नहीं हुआ. अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने की तैयारी कर रहे हैं.

हजारों टन गेहूं की फसलें बर्बाद (सांकेतिक फोटो)हजारों टन गेहूं की फसलें बर्बाद (सांकेतिक फोटो)
क‍िसान तक
  • Raisen,
  • Apr 06, 2026,
  • Updated Apr 06, 2026, 1:13 PM IST

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. यहां सरकारी वेयरहाउस में रखा हजारों टन गेहूं पूरी तरह खराब हो गया. इसे बचाने के लिए कई बार कीटनाशक छिड़के गए, लेकिन सब बेकार साबित हुआ. इस हादसे से सिर्फ 35 करोड़ रुपये का गेहूं नहीं गया, बल्कि इसे बचाने के खर्च ने 150 करोड़ रुपये तक का भार बना दिया.

कैसे सड़ा गेहूं, क्या है पूरा मामला

रायसेन जिले के ओबेदुल्लागंज वेयरहाउस में लगभग 22 हजार टन गेहूं रखा हुआ था. यह गेहूं 2022 में सीहोर जिले के बकतरा से लाया गया था. लंबे समय तक इसे वेयरहाउस में रखा गया. लेकिन समय के साथ यह खराब होने लगा. खराब अनाज को बचाने के लिए 34 बार कीटनाशक छिड़काव किया गया. इसके अलावा, वेयरहाउस का किराया और रखरखाव भी किया गया.

फिर भी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि यह गेहूं अब खाने लायक नहीं रहा. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि इस तरह का खराब अनाज स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है.

क्यों हुआ ऐसा नुकसान

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीहोर जिले से गेहूं रायसेन जिले में क्यों लाया गया. 2022 में नूरगंज और दिवटिया के वेयरहाउस में भी हजारों टन गेहूं खराब हो गया था. फिर भी प्रशासन ने नए गेहूं को दूसरे जिले के वेयरहाउस में रखने की अनुमति दे दी. इस फैसले के पीछे क्या दबाव था और कौन जिम्मेदार है, यह अब भी स्पष्ट नहीं है. अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

कितने रुपये का नुकसान हुआ

खराब हुए गेहूं की कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये बताई जा रही है. लेकिन इसे बचाने के लिए खर्च और बढ़ गया. वेयरहाउस का किराया, रखरखाव और कीटनाशक छिड़काव में कुल मिलाकर लगभग 150 करोड़ रुपये का खर्च हुआ. इतना बड़ा नुकसान न सिर्फ सरकार के लिए चिंता का कारण है, बल्कि आम लोगों और किसानों के लिए भी चिंता का विषय है.

पूरे नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार

अधिकारियों ने कहा है कि वे खराब गेहूं को नीलाम करने या नष्ट करने का फैसला करेंगे. इसके अलावा यह जांच की जा रही है कि इस पूरे नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है.

विशेषज्ञों की राय है कि भविष्य में इस तरह की गलती न हो. अनाज को लंबे समय तक वेयरहाउस में रखने के लिए अच्छे इंतजाम और समय पर निरीक्षण जरूरी है.

इस घटना से यह साफ होता है कि अनाज को सुरक्षित रखना कितना जरूरी है. चाहे कितना भी कीटनाशक छिड़का जाए, अगर समय पर और सही तरीके से रखरखाव नहीं किया गया, तो अनाज खराब हो सकता है. साथ ही, यह भी दिखाता है कि प्रशासन को बेहतर योजना और सावधानी से काम करना चाहिए. यह सिर्फ सरकार का काम नहीं, बल्कि किसानों और आम जनता की भी सुरक्षा का सवाल है.

रायसेन जिले का यह हादसा यह सिखाता है कि अनाज की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता. कीटनाशक और रखरखाव के खर्च के बावजूद अगर सही तरीका अपनाया न जाए तो नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है. अब सवाल यह उठता है कि कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसा कैसे रोका जा सकता है. (राजेश रजक का इनपुट)

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