
गुजरात के गिर इलाके में मशहूर केसर आम की खेती पर अब संकट गहराता जा रहा है. देश-विदेश में अपनी मिठास और खुशबू के लिए पहचान रखने वाला गिर का केसर आम अब जलवायु परिवर्तन यानी ग्लोबल वार्मिंग और बेमौसम बारिश की मार झेल रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि कई किसान अब आम के बाग काटकर दूसरी फसलें उगाने का फैसला कर रहे हैं. तलाला गिर के खीरीधार गांव के किसान प्रवीण भाई इसकी बड़ी मिसाल हैं. उनके परिवार ने 9 बीघा जमीन में केसर आम का बाग लगाया था, जिससे हर साल लाखों रुपये की कमाई होती थी. लेकिन पिछले तीन सालों से उन्हें आम से कोई खास कमाई नहीं हो रही है. उल्टा, हर साल कीटनाशक और मजदूरी पर करीब 80 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, लेकिन उतनी भी पैदावार नहीं मिल रही.
बागवान प्रवीण भाई बताते हैं कि अब मौसम पूरी तरह बदल गया है. बेमौसम बारिश और बढ़ती गर्मी के कारण आम के पेड़ों पर अच्छी फ्लावरिंग तो होती है, लेकिन फल बनने से पहले ही झड़ जाती है या खराब हो जाती है. पहले जहां लाखों रुपये की कमाई होती थी, अब हजारों रुपये की फसल के लिए भी तरसना पड़ रहा है. इसी वजह से उन्होंने अपने आम के बाग को काटकर मूंगफली, उड़द, चना, गेहूं और बाजरा जैसी फसलें उगाने का फैसला किया है. सिर्फ प्रवीण भाई ही नहीं, इलाके के कई किसान इसी तरह आम के बाग हटाकर दूसरी फसलों की ओर जा रहे हैं.
इस मामले पर जब बागायत विभाग के अधिकारी विजय सिंह बारड ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और बेमौसम बारिश का असर आम की खेती पर साफ दिख रहा है. उन्होंने बताया कि करीब 5 फीसदी किसान अपने आम के बाग हटा रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो किसान प्राकृतिक तरीकों से खेती कर रहे हैं, उनकी फसल पर इसका असर कम पड़ा है और उन्हें बेहतर परिणाम मिल रहे हैं.
आंकड़ों पर नजर डालें तो आम की आवक में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. तलाला मैंगो मार्केट में 2019 में 7.75 लाख बॉक्स आम आए थे, जो 2022 तक घटकर करीब 5 लाख बॉक्स रह गए. हालांकि, 2023 में इसमें बढ़ोतरी हुई, लेकिन 2024 में फिर गिरावट दर्ज की गई. बागायत विभाग के अनुसार, गिर सोमनाथ जिले में करीब 19,183 हेक्टेयर जमीन पर आम की खेती होती है, जहां से बड़ी मात्रा में आम का उत्पादन होता है. (दिलीपभाई पुंजाभाई मोरी की रिपोर्ट)