
प्राकृतिक खेती और विविध फसल प्रणाली अपनाकर सोयाबीन उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है. इसका सफल उदाहरण मध्य प्रदेश के इंदौर में ICAR-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान की ओर से तैयार किसान-भागीदारी आधारित मॉडल फार्म में देखने को मिला है. इस मॉडल फार्म में तीन किसानों की भागीदारी से टिकाऊ खेती, बेहतर संसाधन प्रबंधन और अतिरिक्त आमदनी की संभावनाओं को दिखाया गया है.
प्रदर्शन के तहत कुल 3 एकड़ भूमि पर खेती की गई. यहां औसत वार्षिक बारिश 869 मिलीमीटर दर्ज की गई है और मिट्टी चिकनी (क्ले) प्रकृति की है. इस मॉडल फार्म में तीन किसान भागीरथ (ग्राम असरावद खुर्द), चगलाल (ग्राम असरावद खुर्द) और जीवन पटेल (ग्राम कैलोदकरताल) शामिल रहे.
मॉडल फार्म की प्रमुख विशेषता विविध फसल प्रणाली है. इसमें खरीफ सीजन में सोयाबीन, रबी सीजन में गेहूं और गर्मियों में हरी खाद की खेती की जाती है. इसके अलावा मक्का की अंतरफसल और ढैंचा, गेंदा और सुबी की सहायक फसलों को भी शामिल किया गया है.
इस फसल प्रणाली का उद्देश्य भूमि और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और खेती को अधिक टिकाऊ बनाना है.
इस मॉडल फार्म का सबसे महत्वपूर्ण रिजल्ट इसका 2.29 का लाभ-लागत अनुपात (B:C Ratio) है. यह दर्शाता है कि खेती में किए गए निवेश के मुकाबले अच्छा आर्थिक लाभ हासिल करने की संभावना है.
इस मॉडल में जैविक कीट प्रबंधन, विविध फसल प्रणाली, टिकाऊ उत्पादन और किसान-से-किसान सीखने की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया है. किसान इस मॉडल को अपनाकर खेती की लागत और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में काम कर सकते हैं.
यह पहल दिखाती है कि प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण के माध्यम से सोयाबीन आधारित खेती को अधिक टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं.