
लौकी खाने में तो फायदेमंद होती ही है, साथ ही साथ इसकी खेती भी किसानों के लिए काफी फायदेमंद मानी गई है. अगर कुछ रिसर्च पर यकीन करें तो मीडियम साइज के खेतों में अगर लौकी की खेती की जाए तो यह प्रति हेक्टेयर इसकी लागत काफी ज्यादा आती है. लेकिन इससे फायदा भी उतना ही ज्यादा होता है. आज हम आपको लौकी की ऐसी वैरायटी के बारे में बताने जा रहे हैं जो किसानों को बंपर कमाई का मौका दे सकती है. इतना ही नहीं, किसान चाहें तो खरीफ और जायदा दोनों ही सीजन में इसकी खेती कर सकते हैं.
इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) के अनुसार लौकी की काशी शुभ्रा ऐसी वैरायटी है, जो किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है. यह किस्म खरीफ और जायद के अलावा जब लौकी की खेती का सीजन न हो, तो उस समय भी उगाई जा सकती है. ऑफ सीजन में इसकी खेती लो टनल या फिर प्रोटेक्टेड स्ट्रक्चर में की जा सकती है. इस किस्म के फल हल्के हरे रंग के होते हैं और इसका आकार बेलन की तरह होता है. साथ ही इसकी लंबाई 28 से 30 सेंटीमीटर तक होती है.
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काशी शुभ्रा, लौकी की ऐसी किस्म है जिसका रखरखाव काफी आसान होता है. इसकी क्वालिटी बेहतर होने की वजह से यह पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और निर्यात में भी सही रहती है. लौकी की यह किस्म प्रति हेक्टेयर 600 क्विंटल तक की फसल देती है. साथ ही आईसीएआर ने इसकी खेती के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पंजाब को बेहतर माना है. इस किस्म की पहली तुड़ाई बीज बोने के 55 दिन बाद शुरू हो जाती है. फल का औसत वजन करीब 800 ग्राम होता है.
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बताया जाता है कि लौकी इस किस्म का फल बेहद स्वादिष्ट होता है और क्वालिटी भी बेहतर है. यह किस्म लौकी में लगने वाले रोगों के प्रति भी प्रतिरोधी है. साथ ही कमरे के तापमान पर फलों को बिना खराब हुए छह दिनों तक स्टोर करके रखा जा सकता है. लौकी की इस किस्म को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी की तरफ से डेवलप किया गया है. साथ ही इसे 61 फसलों की 109 नई और इंप्रूव्ड वैरीयटीज की उस लिस्ट में शामिल किया गया था जिन्हें इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से देश को समर्पित किया गया है.