सरसों एक मुख्य तिलहन फसल है, जिसका उत्पादन भारत में सबसे ज्यादा (2023-24 में 130 लाख टन) होता है. इसके बाद कनाडा, पाकिस्तान और दूसरे देश हैं. यह फसल भारत में 74% सिंचित इलाके के साथ ठंडे मौसम में अच्छी तरह उगती है, जिसे मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है. हाल के आंकड़े बताते हैं कि पूरे देश में सरसों उत्पादन में वृद्धि देखी जा रही है. इसमें ज्यादा पैदावार वाली किस्में और बेहतर एग्रो-टेक्नोलॉजी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. सॉलवेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) का डेटा बताता है कि 2024-25 के रबी सीजन में भारत में सरसों (रेपसीड-सरसों) का प्रोडक्शन 115.16 लाख टन तक रहा. कुल बोया गया एरिया बढ़कर 92.15 लाख हेक्टेयर हो गया.
राज्यवार प्रोडक्शन डिटेल्स
- SEA के मुताबिक, राजस्थान भारत में सबसे बड़ा सरसों उगाने वाला राज्य बना हुआ है, जहां 34.74 लाख हेक्टेयर खेती का रकबा और 52.03 लाख टन अनुमानित उत्पादन होता है.
- मध्य प्रदेश में पिछले साल 14.86 लाख हेक्टेयर में सरसों बोई गई, जिसका अनुमानित प्रोडक्शन 14.66 लाख टन रहा.
- उत्तर प्रदेश में 14.23 लाख हेक्टेयर में सरसों की खेती हुई, जिसका अनुमानित प्रोडक्शन 15.60 लाख टन है.
- हरियाणा में 7.14 लाख हेक्टेयर में सरसों की खेती होती है और यहां सबसे ज्यादा 1723.14 kg/ha प्रोडक्टिविटी है, जिससे अनुमानित 12.30 लाख टन प्रोडक्शन होता है.
- पश्चिम बंगाल में 6.83 लाख हेक्टेयर में सरसों की खेती होती है, जिससे अनुमानित 6.79 लाख टन प्रोडक्शन होता है.
- गुजरात में खेती का एरिया छोटा होने के बावजूद, सबसे ज्यादा प्रोडक्टिविटी है, जहां कुल अनुमानित 5.38 लाख टन प्रोडक्शन होता है.
- झारखंड, असम और दूसरे राज्यों का कुल प्रोडक्शन 8.39 लाख टन के आसपास है.
सरसों उत्पादन की खास बातें
- मुख्य राज्य: राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल सरसों के प्रोडक्शन में अहम योगदान देते हैं.
- सरसों की खेती: सरसों को ठंडा, कम उतार-चढ़ावा वाला मौसम और काफी नमी वाली मिट्टी चाहिए, जिसमें बीज 8-10 दिनों में उग जाते हैं.
- किस्में और पकने का समय: पीली सरसों 80-85 दिनों में पक जाती है, जबकि भूरी और अन्य किस्मों को 90-95 दिन लगते हैं.
- पैदावार में बढ़ोतरी: भारत में औसत पैदावार 2023-24 में बढ़कर लगभग 1443 kg/ha हो गई है.
- उत्पादन की चुनौतियां: ज्यादा लागत, बढ़ता लेबर चार्ज और कीटों/बीमारियों का ज्यादा लगना किसानों के लिए बड़ी चुनौतियां हैं.