
सरकार ने अल नीनो की चिंताओं के बीच 2026-27 फसल वर्ष (जुलाई-जून) के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373.93 मिलियन टन तय किया है.
अनाज उत्पादन का कुल लक्ष्य 2025-26 फसल वर्ष में हासिल हुए 376.56 मिलियन टन के वास्तविक उत्पादन से 2.63 मिलियन टन कम है. लेकिन इस साल तय किया गया लक्ष्य, 2025-26 फसल वर्ष के लिए तय 362 मिलियन टन के लक्ष्य से अभी भी ज्यादा है.
2026-27 के लिए तय कुल लक्ष्य में से, 2026 खरीफ सीजन के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य 196.21 मिलियन टन और रबी फसल सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन है.
भारत खरीफ (गर्मी) और रबी (सर्दी) सीजन में अलग-अलग फसलें उगाता है. धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई अभी-अभी खत्म हुई है, जबकि गेहूं जैसी रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "अल नीनो के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर, 2026-27 के लिए 373.93 मिलियन टन का कुल राष्ट्रीय अनाज उत्पादन लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन का लक्ष्य शामिल है."
उन्होंने यह भी कहा कि अनाज उत्पादन के लक्ष्य पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखकर और खराब स्थितियों में फसल के पैटर्न को बदलने के लिए राज्यों के साथ बातचीत करके तय किए गए हैं.
जहां तक रबी की बुवाई की बात है, मंत्री ने कहा कि योजना बनाते समय अल नीनो की स्थितियों और हाल ही में खत्म हुए खरीफ सीज़न के दौरान कुछ हिस्सों में आई सूखे और बाढ़ जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखा जा रहा है.
उन्होंने कहा, "हमारा मकसद उन इलाकों में अधिक पानी वाली फसलें न उगाना है जहां बारिश कम हुई है और जहां जलाशय का स्तर और मिट्टी में नमी कम है. इसके बजाय, हम उन इलाकों में दाल और तिलहन जैसी फ़सलें उगाना चाहते हैं. ये लक्ष्य इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर तय किए गए हैं."
जब उनसे 2026 के आखिर तक अल नीनो के "बहुत मजबूत" होने के ग्लोबल अनुमान के बारे में पूछा गया, तो चौहान ने कहा कि सरकार मौजूदा हालात में उगाई जाने वाली फसलों और उनकी किस्मों पर राज्यों के साथ विस्तार से बातचीत कर रही है.
उन्होंने कहा कि बारिश, पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी में क्षेत्रीय अंतर के हिसाब से फसल की योजना में बदलाव किया जा रहा है, और जहां भी सूखे जैसे हालात बनेंगे, वहां आपातकालीन उपाय अपनाए जाएंगे.
उन्होंने कहा, "हालांकि अभी बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा संकट नहीं है." उन्होंने आगे कहा कि मुश्किलें कुछ खास इलाकों तक ही सीमित हैं.
खाद के बारे में चौहान ने कहा कि कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव के बावजूद - कुछ मामलों में तो कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं - खाद की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है.
उन्होंने कहा, "देश में खाद की कोई कमी नहीं है और रबी सीजन के लिए पर्याप्त सप्लाई उपलब्ध रहेगी."
राज्यों द्वारा 2026-27 के लिए बताई गई जरूरतों के आधार पर, खाद की कुल जरूरत का अनुमान 380 लाख टन लगाया गया है.
मौजूदा शुरुआती स्टॉक 163 लाख टन से अधिक है, जो पिछले साल रबी सीजन की शुरुआत में उपलब्ध 122 लाख टन से काफी ज़्यादा है.
अभी-अभी खत्म हुए खरीफ बुवाई सीजन पर मंत्री ने कहा कि अल नीनो की चिंताओं और देश के कुछ हिस्सों में सूखे और बाढ़ के बावजूद खरीफ अनाज के उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी.
उन्होंने कहा कि सरकार ने अप्रैल में ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी थी.
कुछ खरीफ फसलों के बुवाई क्षेत्र में कमी आई है, लेकिन कुल बुवाई क्षेत्र मोटे तौर पर पिछले साल के बराबर ही है. उन्होंने कहा कि अभी बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी है, जबकि सूखे की स्थिति आम तौर पर तब मानी जाती है जब संबंधित अवधि में बारिश की कमी 20 प्रतिशत से ज़्यादा हो. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि इस कमी से उत्पादन पर कोई खास असर पड़ेगा." उन्होंने यह भी कहा कि उत्पादन के अंतिम आंकड़े जल्द ही जारी किए जाएंगे.
खेती के रकबे में सबसे ज्यादा कमी धान की खेती में आई है, जहां खेती का रकबा लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर कम हो गया है. मक्का, सोयाबीन और कपास की खेती के रकबे में भी कमी आई है. वहीं, उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर की खेती का रकबा बढ़ा है.
मंत्री ने कहा, "इससे पता चलता है कि किसान अब दालों और मोटे अनाजों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं."
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में खेती के रकबे में कमी की सूचना मिली है. इन राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर में फसलें प्रभावित हुई हैं और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है.
मंत्री ने यह भी कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, तेलंगाना और राजस्थान में सूखे की स्थिति को लेकर चिंता है.
उन्होंने कहा, "अब तक मिली जानकारी से कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों (जिसमें रायलसीमा और आसपास के इलाके शामिल हैं), तेलंगाना के कुछ हिस्सों और राजस्थान के कुछ हिस्सों को लेकर चिंता है. राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है."
राज्य के अनुरोध पर एक केंद्रीय टीम 3 अक्टूबर को कर्नाटक का दौरा करेगी.