
आंध्र प्रदेश में हालिया गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) के कारण हुई भारी बारिश ने खेती को बड़े स्तर पर प्रभावित किया है. राज्य सरकार के शुरुआती आकलन के मुताबिक, 1,229 गांवों में 44,029 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं. इस नुकसान से करीब 72 हजार किसान प्रभावित बताए गए हैं. अधिकारियों ने कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू को बताया कि फसल नुकसान 190 मंडलों में सामने आया है. हालांकि, अभी तक 19 मंडलों के 45 गांवों में ही फसल नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा हो पाया है. सरकार बाकी प्रभावित इलाकों में भी नुकसान का सर्वे तेज कर रही है.
भारी बारिश और गहरे दबाव का असर बागवानी फसलों पर भी पड़ा है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 89 मंडलों के 351 गांवों में 1,734 हेक्टेयर बागवानी क्षेत्र प्रभावित हुआ है. इससे करीब 5,777 किसानों को नुकसान होने का अनुमान है.
कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू ने अधिकारियों को फसल नुकसान की गणना जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित खेतों का व्यक्तिगत रूप से दौरा करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी प्रभावित किसान सर्वे से बाहर न रहे.
इस बीच मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के रायालसीमा क्षेत्र में 28 सितंबर से तीन दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान जताया है. कुछ इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक रायालसीमा में हवा की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के कुछ इलाकों में भी गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है.
मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर ऊपरी हवा का परिसंचरण बना हुआ है. इसके अलावा आंध्र प्रदेश और यनम के ऊपर निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर उत्तर-पश्चिमी हवाएं चल रही हैं. मौसम विभाग के अनुसार उत्तर अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट के ऊपर बने डिप्रेशन के प्रभाव से 28 और 29 सितंबर को अंडमान द्वीप समूह में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है.
इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है. पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 28 सितंबर को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगिट-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है. इन क्षेत्रों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है.
मौसम विभाग ने बताया कि 30 सितंबर से उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम होने और मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना है. वहीं, 2 अक्टूबर से मध्य भारत के बड़े हिस्से में भी मुख्य रूप से शुष्क मौसम की स्थिति बन सकती है. (एजेंसी इनपुट के साथ)