Cumin Production: जीरा फसल पर मौसम की मार! रकबा भी घटा, म‍िडिल-ईस्‍ट युद्ध से निर्यात पर संकट

Cumin Production: जीरा फसल पर मौसम की मार! रकबा भी घटा, म‍िडिल-ईस्‍ट युद्ध से निर्यात पर संकट

देश में जीरा फसल के नए सीजन के साथ उत्पादन को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं. कम रकबा, कमजोर सर्दी और बढ़ते तापमान से फसल पर दबाव बताया जा रहा है. वहीं, वेस्ट एशिया में जारी युद्ध के कारण निर्यात अनिश्चितता भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है.

Jeera ProductionJeera Production
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 05, 2026,
  • Updated Mar 05, 2026, 2:44 PM IST

देश में जीरा फसल के नए सीजन की आवक शुरू होते ही उत्पादन और बाजार को लेकर तस्वीर साफ होने लगी है. इस बार कम रकबा, कमजोर सर्दी, बढ़ता तापमान और ब्लाइट जैसी बीमारी ने फसल पर दबाव बढ़ाया है. दूसरी ओर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण निर्यात गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं, जिससे घरेलू बाजार में कारोबारियों का रुख फिलहाल सतर्क बना हुआ है.

फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स (FISS) के मुताबिक 2026 में देश का जीरा उत्पादन करीब 5 प्रतिशत घटकर 5.13 लाख टन रह सकता है, जबकि पिछले साल यह 5.38 लाख टन था. 55 किलोग्राम की बोरियों के हिसाब से यह उत्पादन लगभग 93.29 लाख बैग बैठता है, जो पिछले साल के 97.93 लाख बैग से कम है.

इन राज्‍यों में उत्‍पादन घटने की आशंका

राज्यवार स्थिति देखें तो गुजरात में उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान है. यहां रकबा करीब 18 प्रतिशत घटने और उपज में लगभग 11 प्रतिशत कमी के कारण उत्पादन 27 प्रतिशत गिरकर करीब 1.83 लाख टन रह सकता है. वहीं, राजस्थान में रकबा बढ़ने और उपज बेहतर रहने से उत्पादन करीब 15 प्रतिशत बढ़कर 3.29 लाख टन तक पहुंचने की संभावना जताई गई है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स के संस्थापक अध्यक्ष अश्विन नायक का कहना है कि फसल की स्थिति सामान्य है, लेकिन पिछले साल की तुलना में उत्पादन थोड़ा कम रह सकता है. उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध लंबा खिंचता है तो निर्यात प्रभावित होगा और इसका असर कीमतों पर भी पड़ सकता है.

ज्‍यादा तापमान से उपज पर असर पड़ा: मसाला कारोबारी

राजस्थान के मसाला कारोबारियों का मानना है कि उत्पादन अनुमान से कम रह सकता है. राजस्थानी एसोसिएशन ऑफ स्पाइसेज के वित्त निदेशक दिनेश सोनी ने कहा कि  इस साल उत्पादन लगभग 80 से 82 लाख बैग तक रह सकता है. उन्होंने बताया कि फसल के दौरान सामान्य से अधिक तापमान रहने से उपज प्रभावित हुई है.

हालांकि, करीब 20 लाख बैग का कैरीओवर स्टॉक जोड़ने के बाद कुल आपूर्ति 1 करोड़ बैग से अधिक रहने की संभावना है. उन्होंने कहा कि उपलब्ध जीरे में से करीब 60 से 65 लाख बैग घरेलू खपत में इस्तेमाल होंगे, जबकि शेष मात्रा निर्यात के लिए उपलब्ध रहेगी. नई फसल की आवक शुरू होने के साथ ही कच्चे जीरे की कीमतें भी नरम पड़ी हैं और फिलहाल यह लगभग 180 से 190 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है.

'जीरे की जगह किसानों ने सरसों पर जताया भरोसा'

जोधपुर स्थित साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के संस्थापक निदेशक भगीरथ चौधरी ने कहा कि इस साल उत्पादन में कम से कम 10 प्रतिशत गिरावट आ सकती है. उन्होंने बताया कि बुवाई के समय अच्छी बारिश होने के कारण कई किसानों ने जीरे की जगह सरसों की खेती को तरजीह दी, जिससे रकबा घट गया. इसके अलावा इस बार सर्दियों की अवधि सामान्य से कम रहने और तापमान में अचानक बढ़ोतरी का असर भी फसल पर पड़ा है.

जीरा फसल पर बीमारी का खतरा मंडराया

अब कई इलाकों में ब्लाइट बीमारी के मामले भी सामने आने लगे हैं. स्पाइस एक्सपोर्ट से जुड़े कारोबारी योगेश मेहता का अनुमान है कि इस साल जीरा उत्पादन करीब 20 प्रतिशत घटकर 4.4 लाख टन तक रह सकता है. उन्‍होंने कहा कि गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में फसल कमजोर है, जबकि राजस्थान में स्थिति बेहतर बताई जा रही है. हालांकि, ईरान-इजरायल युद्ध के कारण फिलहाल निर्यात गतिविधियां धीमी हैं, जिससे बाजार की धारणा कमजोर बनी हुई है.

मेहता ने कहा कि अगले दो से तीन हफ्ते तक निर्यात मांग कमजोर रह सकती है और अप्रैल के पहले सप्ताह से इसमें सुधार की संभावना है. फिलहाल स्पॉट बाजार में जीरे की कीमतें लगभग 4,200 रुपये प्रति 20 किलोग्राम के आसपास चल रही हैं. अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो कीमतों पर और दबाव बन सकता है. चीन से खरीदारी की मांग भी अप्रैल के मध्य तक आने की उम्मीद जताई जा रही है.

कुछ व्‍यापारियों का अनुमान- उत्‍पादन हल्‍का बढ़ेगा

हालांकि, मसाला व्यापार के एक वर्ग का मानना है कि इस साल उत्पादन में हल्की बढ़ोतरी भी हो सकती है. कोच्चि में आयोजित इंटरनेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2026 में पेश एक रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर पैदावार के चलते देश का कुल जीरा उत्पादन 5 से 7 प्रतिशत बढ़कर 5.3 से 5.4 लाख टन तक पहुंच सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि गुजरात में रकबा घटने से उत्पादन में कमी जरूर होगी, लेकिन राजस्थान में बढ़े रकबे और बेहतर उपज से इसकी भरपाई हो सकती है. निर्यात के मोर्चे पर भी हाल के महीनों में गिरावट दर्ज की गई है. अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान भारत से जीरा निर्यात करीब 12 प्रतिशत घटकर 1.56 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1.78 लाख टन था. मूल्य के लिहाज से भी निर्यात 585 मिलियन डॉलर से घटकर 418 मिलियन डॉलर रह गया.

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