
किसानों के लिए हर मौसम एक चुनौती लेकर आता है. गेहूं, सरसों, चना या प्याज हर फसल पर कीट और रोग का खतरा हमेशा बना रहता है. अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो मेहनत और फसल दोनों नष्ट हो सकते हैं. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं! इस मौसम में फसल को सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान और असरदार तरीके हैं. सही समय पर छिड़काव, पौधों की सही देखभाल और खेत की नियमित निगरानी से आप अपनी फसल को कीट और रोग मुक्त रख सकते हैं और अच्छी उपज पा सकते हैं.
अगर गेहूं की फसल में दीमक दिखाई दे, तो किसान सावधानी बरतें. बचाव के लिए क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. का प्रयोग करें. इसे 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से 20 कि.ग्रा. बालू में मिलाकर खेत में शाम को छिड़क दें. इससे दीमक का खतरा कम हो जाएगा और फसल सुरक्षित रहेगी.
सरसों की फसल में चेंपा कीट के लिए लगातार निगरानी जरूरी है. अगर कोई हिस्सा प्रभावित दिखे, तो उसे तुरंत काट कर फेंक दें. इससे कीट पूरे खेत में नहीं फैलेंगे और फसल सुरक्षित रहेगी.
चने की फसल में फली छेदक कीट पर नजर रखने के लिए फेरोमोन ट्रैप 3-4 प्रति एकड़ लगाए. यह तब करें जब पौधों में 10-15 फीसद फूल खिल चुके हों. इसके अलावा, खेत में ‘T’ का अक्षर पक्षी के घोसले के अलग-अलग जगहों पर लगाएं. इससे कीट और पक्षियों का संतुलन बना रहेगा.
कदूवर्गीय सब्जियों के लिए बीज तैयार करने के लिए बीजों को छोटे पॉलिथीन थैलों में भरकर पाली घर में रखें. इससे बीज सुरक्षित रहेंगे और अच्छे पौधे उगेंगे.
इस मौसम में बन्दगोभी, फूलगोभी और गांठगोभी की रोपाई खेत के मेड़ों पर कर सकते हैं. पौधों को छोटी क्यारियों में लगाएं और रोपाई से 10-15 दिन पहले 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद डाल दें. इसके साथ ही 20 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60-70 कि.ग्रा. फॉस्फोरस और 80-100 कि.ग्रा. पोटाश अंतिम जुताई में डालें. रोपाई में पौधों की दूरी 10 से.मी. और कतार से कतार की दूरी 15 से.मी. रखें.
इस मौसम में पालक, धनिया और मेथी की बुवाई की जा सकती है. पत्तों को बढ़ाने के लिए 20 कि.ग्रा. यूरिया प्रति एकड़ की दर से खेत में छिड़काव करें. इससे पत्तियां हरी और बढ़िया होंगी.
गाजर का बीज बनाने के लिए अगर आपने उन्नत किस्मों के उच्च गुणवत्ता वाले बीज लगाए हैं और फसल 90-105 दिन की हो रही है, तो जनवरी के पहले पखवाड़े में खुदाई करें. लंबी गाजर का चुनाव करें, जिसमें पत्ते कम हों. पत्तियों को 4 इंच ऊपर से काट दें और बाकी गाजर को काटकर बीज वाली गाजर को 45 से.मी. की दूरी और 6 इंच के अंतराल पर लगाएं. इसके बाद पानी दें.
तैयार खेतों में प्याज की रोपाई करें. पौधे छह सप्ताह से ज्यादा उम्र के न हों. रोपाई छोटे क्यारियों में करें. मिट्टी और पौधों की दूरी45 से.मी. की दूरी और 6 इंच के अंतराल पर लगाएं.
गोभीवर्गीय फसल में हीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक, टमाटर में फल छेदक की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप 3-4 प्रति एकड़ खेतों में लगाएं. इससे कीटों की संख्या कंट्रोल होगी.
गेंदे की फसल में पूष्प सड़न रोग पर नजर रखें. अगर लक्षण दिखें, तो बाविस्टिन 1 ग्राम/लीटर या इन्डोफिल-एम 45- 2 मिली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. इससे रोग फैलने से पहले ही रोका जा सकता है.
इस मौसम में किसान यदि इन सभी सावधानियों का पालन करें तो उनकी फसल कीट और रोगों से सुरक्षित, और पौष्टिक रहेगी. समय पर छिड़काव, सही दूरी पर रोपाई और बीजों की सही तैयारी फसल को स्वस्थ बनाएगी. छोटे-छोटे उपाय करने से फसल की उपज भी बढ़ेगी और किसान का मेहनताना सुरक्षित रहेगा.
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