Mustard Variety: सरसों किसानों के लिए खुशखबरी, नई किस्‍म 'गोवर्धन' को बिक्री-खेती की मंजूरी, पढ़ें इसकी खासियत

Mustard Variety: सरसों किसानों के लिए खुशखबरी, नई किस्‍म 'गोवर्धन' को बिक्री-खेती की मंजूरी, पढ़ें इसकी खासियत

Govardhan Mustard Variety: सरसों किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. ‘गोवर्धन’ नाम की नई सरसों किस्म को केंद्र सरकार से बिक्री और खेती की मंजूरी मिल गई है. यह किस्म देर से बुवाई में भी बेहतर उत्पादन दे सकती है. पढ़ें इसकी खासि‍यत...

Govardhan Mustard Variety Sale PermissionGovardhan Mustard Variety Sale Permission
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 03, 2026,
  • Updated Jan 03, 2026, 6:58 PM IST

देश को तिलहन उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अच्‍छी खबर सामने आई है. चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर की बनाई सरसों की नई किस्म ‘गोवर्धन’ को अब पूरे देश में बिक्री और खेती की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है. भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय बीज समिति ने इस किस्म को अधिसूचित कर दिया है. समिति की ओर से 31 दिसंबर 2025 को इसके लिए नोटिफिकेशन जारी की गई.

देर से बुवाई में भी अच्‍छी पैदावार देगी किस्‍म

नई किस्म को खेती के लिए हरी झंडी मिलने के बाद उम्मीद है कि खासतौर पर उत्तर प्रदेश में सरसों की खेती को नई मजबूती मिलेगी. विश्वविद्यालय के सरसों अभिजनक और प्रोफेसर डॉ महक सिंह के मुताबिक, यह किस्म उत्तर प्रदेश की सभी कृषि-जलवायु परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है. खास बात यह है कि ‘गोवर्धन’ किस्म बहुत देरी से बुवाई की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करती है. किसान 20 से 30 नवंबर तक बुआई करने पर भी बेहतर उत्पादन ले सकते हैं.

रोगों और कीटों के प्रति प्रत‍िराेधक है गोवर्धन किस्‍म

डॉ सिंह ने बताया कि ‘गोवर्धन’ किस्म किसानों को अधिक पैदावार देने के साथ-साथ प्रमुख बीमारियों और कीटों के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता भी प्रदान करती है. यह किस्म केएमआरएल 17-5 नाम से विकसित की गई है और अपनी उच्च उत्पादकता तथा अनुकूलन क्षमता के कारण मौजूदा सरसों किस्मों के बीच एक अहम विकल्प बनकर उभरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म सरसों उत्पादन के क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित हो सकती है.

इतने दिनों में पककर तैयार होगी फसल

इस नई किस्म की एक और बड़ी विशेषता इसका उच्च तेल प्रतिशत है. ‘गोवर्धन’ में लगभग 39.6 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई गई है. फसल 120 से 125 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. परीक्षणों के दौरान यह सामने आया है कि यह किस्म राष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित सरसों की किस्मों की तुलना में करीब 7.81 प्रतिशत अधिक उपज देती है. ऐसे में किसानों की आमदनी बढ़ाने में यह किस्म अहम भूमिका निभा सकती है.

परीक्षण में सभी मानकों पर खरी उतरी किस्‍म

विश्वविद्यालय के निदेशक (शोध) डॉ आरके यादव ने कहा कि इस नई किस्म के आने से किसानों को उनकी भौगोलिक परिस्थितियों और खेती की जरूरतों के अनुसार अधिक विकल्प मिलेंगे. उन्होंने बताया कि किस्म को मंजूरी देने से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में इसका कठोर परीक्षण और मूल्यांकन किया गया है, ताकि गुणवत्ता, उत्पादकता और उपयुक्तता के सभी मानकों पर यह खरी उतर सके.

विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ खलील खान ने कहा कि केंद्रीय बीज समिति द्वारा इस भारतीय सरसों किस्म को स्वीकृति मिलना कृषि नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है. इससे फसल उत्पादकता बढ़ेगी, खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और तिलहन मिशन को गति मिलेगी.

कुलपति ने वैज्ञानिकों की टीम को दी बधाई

वहीं, मंडलायुक्त और विश्वविद्यालय के कुलपति के विजयेंद्र पांडियन ने सरसों की ‘गोवर्धन’ किस्म विकसित करने वाले वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह किस्म निश्चित तौर पर देश और प्रदेश के किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी और सरसों की खेती को नई दिशा देगी.

MORE NEWS

Read more!