Rabi Sowing: गेहूं की बुवाई लगभग पूरी, चना-सरसों का क्‍या है हाल? जानें कृषि आयुक्‍त ने रबी उत्‍पादन को लेकर क्‍या कहा

Rabi Sowing: गेहूं की बुवाई लगभग पूरी, चना-सरसों का क्‍या है हाल? जानें कृषि आयुक्‍त ने रबी उत्‍पादन को लेकर क्‍या कहा

देश में रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और फसल की हालत को लेकर सरकार ने राहत की बात कही है. चना और सरसों के रकबे में बढ़ोतरी के संकेत भी मिले हैं. कृषि आयुक्‍त ने रबी उत्पादन को लेकर क्या अनुमान जताया है और आगे क्या असर पड़ेगा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

गेहूं की खेतीगेहूं की खेती
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 01, 2026,
  • Updated Jan 01, 2026, 9:21 PM IST

देश में चालू रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुआई लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और फिलहाल फसल की हालत को लेकर तस्वीर काफी सकारात्मक दिखाई दे रही है. कृषि आयुक्त पीके सिंह ने बताया कि 29 दिसंबर तक देशभर में करीब 3.22 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले रबी सीजन के कुल रकबे के बेहद करीब है. पिछले वर्ष गेहूं की बुआई लगभग 3.28 करोड़ हेक्टेयर में की गई थी और इस बार भी कुल रकबा उसी स्तर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है.

फसल की बढ़वार बेहतर

कृषि आयुक्त ने बताया कि बिहार के कुछ सीमित इलाकों को छोड़ दिया जाए तो देश के लगभग सभी प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बुवाई का काम पूरा हो चुका है. समय पर और शुरुआती दौर में बुवाई होने से फसल की बढ़वार अच्छी बनी हुई है और अब तक किसी भी राज्य से गेहूं की फसल को लेकर किसी तरह की बड़ी समस्या की सूचना नहीं मिली है.  कृषि आयुक्त के अनुसार, मौजूदा हालात में गेहूं की फसल उत्कृष्ट स्थिति में है और मौसम का भी अब तक अनुकूल सहयोग मिला है.

ज्‍यादातर बोई किस्‍में मुसीबत झेलने में सक्षम

इस रबी सीजन की एक अहम खासियत यह भी रही है कि बोए गए कुल गेहूं क्षेत्र का 73 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जलवायु अनुकूल और जैव-संवर्धित बीज किस्मों से आच्छादित है. ये किस्में बदलते मौसम, तापमान में उतार-चढ़ाव और संभावित मौसमी असामान्यताओं का बेहतर तरीके से सामना करने में सक्षम मानी जाती हैं. इससे आने वाले महीनों में फसल पर मौसम का नकारात्मक असर पड़ने की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाती है.

चना-सरसों के रकबे में बढ़ोतरी

गेहूं के साथ-साथ दलहन और तिलहन फसलों की बुवाई भी देशभर में पूरी हो चुकी है. खास तौर पर चना और सरसों के रकबे में इस बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे इन फसलों के उत्पादन को लेकर भी अच्छे संकेत मिल रहे हैं. वहीं, दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में धान की रोपाई जनवरी के अंत तक जारी रहने की संभावना है.

उत्‍पादन के लिहाज से पॉजिटिव सीजन

ऐसे में अगर आने वाले महीनों में मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहता है तो रबी सीजन में मजबूत गेहूं उत्पादन देखने को मिल सकता है. अच्छा उत्पादन होने से सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त गेहूं उपलब्ध रहेगा और बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलेगी. इसके साथ ही दलहन और तिलहन की बेहतर पैदावार से आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है, जो देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों दोनों के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. (पीटीआई के इनपुट के साथ)

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