
नई दिल्ली में मौजूद अमेरिकी कृषि विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 में भारत में मूंगफली का उत्पादन करीब 3 फीसदी तक बढ़ सकता है. इसकी वजह यह है कि मूंगफली के अच्छे दाम मिल रहे हैं और इसकी मांग भी बनी हुई है, इसलिए कुछ किसान कपास की खेती छोड़कर तिलहन जैसे मूंगफली की खेती की ओर तेजी से रुख कर सकते हैं. अपनी नए रिपोर्ट में, एफएएस (विदेशी कृषि सेवा) नई दिल्ली (पोस्ट) ने अनुमान लगाया है कि भारत में मूंगफली का रकबा 2026-27 के दौरान 2 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.7 लाख हेक्टेयर हो जाएगा, जो पिछले वर्ष के 5.62 लाख हेक्टेयर से अधिक है.
नई और ज्यादा पैदावार देने वाली किस्मों को अपनाने और लगातार हो रहे शोध की वजह से मूंगफली का उत्पादन करीब 3 फीसदी बढ़कर 7.75 लाख टन होने का अनुमान है. इससे मूंगफली किसानों के लिए एक ज्यादा फायदेमंद विकल्प बनती जा रही है और वे दूसरी फसलों की जगह इसे ज्यादा अपनाने लगे हैं. बता दें कि ये शोध खासकर गुजरात में की जा रही है. क्योंकि मूंगफली की खेती में ये राज्य सबसे आगे है.
रिपोर्ट के मुताबिक, मूंगफली की प्रोसेसिंग (पेराई) भी बढ़ने वाली है. इसकी वजह है कि खाने के लिए और पशुओं के चारे, दोनों के लिए मूंगफली की मांग लगातार बढ़ रही है. इसी कारण पेराई में करीब 2 फीसदी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इसके अलावा घरों में लोग अब नाश्ते के तौर पर भी ज्यादा मूंगफली खा रहे हैं. वहीं, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में इसे पशुओं के चारे के रूप में भी ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें करीब 9 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान है. इसका असर यह होगा कि मूंगफली से बनने वाली खली (पशु आहार) का उत्पादन भी बढ़ेगा, जो करीब 3 फीसदी बढ़कर 1.8 लाख टन तक पहुंच सकता है. साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि मूंगफली के तेल का उत्पादन भी 4 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, और चीन से लगातार बनी मांग के चलते इसके निर्यात में 8 फीसदी की वृद्धि होने की संभावना है.
मूंगफली का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि अब किसान कपास की जगह मूंगफली उगाने लगे हैं. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मूंगफली और मक्का जैसी फसलों में ज्यादा मुनाफा मिल रहा है. इसी वजह से कपास की खेती का क्षेत्र करीब 2 फीसदी कम होने का अनुमान है. इसका असर कपास से जुड़े दूसरे उत्पादों पर भी पड़ेगा, जैसे कपास के बीज का उत्पादन करीब 1 फीसदी घटकर 9.9 लाख टन रह सकता है. वहीं, कपास की खली जो पशु चारे में इस्तेमाल होती है उसका का उत्पादन भी घटकर करीब 4 लाख टन तक आ सकता है.
हालांकि, देखा जाए तो मूंगफली के उत्पादन में हुई बढ़ोतरी, दूसरे तिलहनों के उत्पादन में आई गिरावट की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर पाएगी. मार्केटिंग वर्ष 2026-27 के लिए कुल तिलहन उत्पादन का अनुमान 41 लाख टन लगाया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम है. इसकी वजह यह है कि किसान अब सोयाबीन से हटकर ज़्यादा फायदेमंद विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. जहां एक ओर कुल पेराई की मात्रा 34 लाख टन पर स्थिर रहने की उम्मीद है, वहीं सोयाबीन का उत्पादन कम होने के कारण कुल ऑयलमील का उत्पादन थोड़ा घट कर 20.1 लाख टन तक पहुंच सकता है, क्योंकि दूसरे तिलहनों के मुकाबले सोयाबीन से ज़्यादा मात्रा में ऑयलमील निकलता है.