बीड के तरबूज किसान दोहरी मार के शिकार, बेमौसम बारिश और वैश्विक संकट ने की फसल बर्बाद

बीड के तरबूज किसान दोहरी मार के शिकार, बेमौसम बारिश और वैश्विक संकट ने की फसल बर्बाद

महाराष्ट्र के बीड जिले के तरबूज किसान बेमौसम बारिश और वैश्विक संकट की दोहरी मार झेल रहे हैं. युवा किसान प्रवीण महादेव पितळे जैसे प्रयोगशील किसान अपनी फसल और आय खो रहे हैं. किसानों की मदद, फसल बीमा और सरकारी अनुदान की तत्काल जरूरत है ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे और खेती को बढ़ावा मिले.

beed Crop Lossbeed Crop Loss
रोहिदास हातागले
  • Beed,
  • Apr 05, 2026,
  • Updated Apr 05, 2026, 11:45 AM IST

महाराष्ट्र के बीड जिले के किसान आज दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. एक तरफ बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को बर्बाद किया है, तो दूसरी तरफ वैश्विक भू-राजनीतिक संकट ने निर्यात को ठप कर दिया है. इन परिस्थितियों में जिले के युवा और प्रयोगशील किसान भी अपनी मेहनत और सपनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

युवा किसान का साहस और उम्मीदें

अंबाजोगाई तहसील के पट्टीवडगाँव के प्रवीण महादेव पितळे ने पारंपरिक खेती छोड़कर तरबूज की खेती करने का साहस दिखाया. पिछले दो वर्षों में उनकी मेहनत सफल रही. 2023 में डेढ़ एकड़ में 20 टन उत्पादन से उन्हें लगभग 1 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ. 2024 में एक एकड़ में 16 टन उत्पादन और 1 लाख रुपये का लाभ मिला. इस सफलता ने प्रवीण को बड़ा निवेश करने के लिए प्रेरित किया. 2025 में उन्होंने तीन एकड़ में तरबूज लगाए और लगभग 30 टन उत्पादन और 3.5 लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद की.

निर्यात ठप होने और दाम गिरने की मार

प्रवीण की मेहनत पर संकट तब आया जब वैश्विक युद्ध की वजह से निर्यात पूरी तरह बंद हो गया. निर्यात न होने से स्थानीय मंडियों में तरबूज के दाम धड़ाम से गिर गए. वहीं, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में तैयार फसल को बर्बाद कर दिया. इस स्थिति में प्रवीण जैसे किसानों की आय पूरी तरह ठप हो गई.

फसल बीमा और सरकारी मदद की जरूरत

किसानों का कहना है कि बेल वाली फसलों (Cucurbits) के लिए सरकार की ओर से कोई सब्सिडी या फसल बीमा योजना उपलब्ध नहीं है. जब कोई प्राकृतिक या वैश्विक संकट आता है, तो किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाता है. ऐसे में किसान आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव के कारण आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकते हैं. किसान मांग कर रहे हैं कि बेल वाली फसलों को फसल बीमा में शामिल किया जाए, नुकसान झेल रहे उत्पादकों को विशेष अनुदान मिले और संकटग्रस्त बागवानी किसानों का कर्ज माफ किया जाए या उन्हें आर्थिक सहायता दी जाए.

बीड जिले में भारी तबाही

मौसम विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल को हुई भीषण ओलावृष्टि और बारिश ने बीड जिले में भारी तबाही मचाई है. जिले के चार तहसीलों के 12 गांवों में फसल बर्बाद हुई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल 5,548 किसान प्रभावित हुए हैं और 237 हेक्टेयर से अधिक की फसल खराब हो गई. फसलों के नुकसान के साथ-साथ कई मवेशियों की भी मौत हुई है.

प्रशासन की भूमिका और किसानों की उम्मीद

अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन प्रयोगशील किसानों की आवाज सुनेगा? बीड जिले के किसान सरकार से मदद और मुआवजा पाने की उम्मीद लगाए हुए हैं. उनका मानना है कि यदि सही समय पर आर्थिक और नीतिगत सहायता नहीं मिली, तो जिले के तरबूज और अन्य बागवानी उत्पादक किसानों की मेहनत और भविष्य दोनों खतरे में हैं.

बीड जिले का मामला यह दिखाता है कि किसान न केवल प्राकृतिक आपदाओं बल्कि वैश्विक बाजार और नीति संकटों के शिकार भी हो रहे हैं. युवा और प्रयोगशील किसान जैसे प्रवीण महादेव पितळे अपने साहस और मेहनत से नए प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की मदद और सही नीतियों के बिना उनका संघर्ष अक्सर असफल साबित हो रहा है. अब ज़रूरत है कि प्रशासन और राज्य सरकार संकटग्रस्त किसानों के लिए ठोस कदम उठाएं और उन्हें सुरक्षा और आर्थिक सहारा प्रदान करें.

ये भी पढ़ें: 

भारत में शुद्ध और प्राकृतिक शहद का नया दौर, स्वाद, स्वास्थ्य और पारदर्शिता की पहचान
पंजाब में बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की बढ़ी चिंता, फसलों को भारी नुकसान

MORE NEWS

Read more!