
महाराष्ट्र के प्रमुख केला उत्पादक क्षेत्रों में फसल को प्रभावित करने वाली पनामा (TR4) फंगल बीमारी के मामलों के बाद राज्य सरकार सतर्क हो गई है. बीमारी के प्रसार को रोकने और किसानों को समय रहते बचाव के उपाय बताने के लिए सरकार ने एक संयुक्त समिति गठित करने का फैसला किया है. कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने बताया कि जलगांव जिले में केले की फसल में इस खतरनाक फंगस के लक्षण सामने आने के बाद मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक की गई.
इसके बाद वैज्ञानिक आधार पर नियंत्रण उपाय तय करने और जागरूकता फैलाने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्णय लिया गया है. उन्हाेंने बताया कि यह समिति कृषि वैज्ञानिकों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों को साथ लेकर काम करेगी.
समिति का मुख्य उद्देश्य बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना और किसानों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना होगा. समिति को यह भी जिम्मेदारी दी गई है कि यदि किसी क्षेत्र में यह फंगस पाया जाता है तो उसके फैलाव को तुरंत रोकने के लिए आपातकालीन कदमों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए.
कृषि मंत्री ने समिति के सदस्यों को जलगांव, पुणे और सोलापुर जैसे प्रमुख केला उत्पादक जिलों का दौरा करने के निर्देश दिए हैं. इस दौरान वे किसानों से बातचीत करेंगे, वैज्ञानिकों और अधिकारियों के साथ बैठक कर फसल सुरक्षा के लिए एक समग्र कार्ययोजना तैयार करेंगे.
इसके साथ ही कृषि विभाग केला उत्पादक जिलों में विशेष जागरूकता अभियान भी चलाएगा. किसानों के लिए मार्गदर्शन शिविर आयोजित किए जाएंगे और तकनीकी जानकारी से जुड़ी पुस्तिकाएं वितरित की जाएंगी, ताकि किसान समय रहते इस बीमारी की पहचान कर बचाव के उपाय अपना सकें.
इधर, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया कि महाराष्ट्र का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) करीब 51 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीएसडीपी 28.82 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है, जिसका कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में लगभग 60 प्रतिशत योगदान है और इसके करीब 9 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है.
इसमें वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई गई है. रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि इन क्षेत्रों में निरंतर विस्तार से राज्य की समग्र आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और आने वाले समय में विकास दर को सहारा मिलेगा. (पीटीआई)