पिछले साल बाढ़, इस बार सूखा: बीड में किसानों ने किया प्रदर्शन, सोयाबीन फसल के साथ जलाया सरकारी आदेश

पिछले साल बाढ़, इस बार सूखा: बीड में किसानों ने किया प्रदर्शन, सोयाबीन फसल के साथ जलाया सरकारी आदेश

बीड के मांजरा क्षेत्र में फसल बर्बादी से नाराज किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. किसानों ने सूखी सोयाबीन की फसल और सरकारी जीआर की होली जलाकर विरोध जताया. किसानों ने सोयाबीन नुकसान के लिए प्रति एकड़ 50 हजार और गन्ना किसानों के लिए एक लाख रुपये की सहायता की मांग की.

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रोहिदास हातागले
  • Beed,
  • Oct 02, 2026,
  • Updated Oct 02, 2026, 12:28 PM IST

महाराष्ट्र के बीड जिले के मांजरा क्षेत्र में फसल बर्बादी से परेशान किसानों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. किसानों ने खेतों में उतरकर मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की और 'बोम्बा मारा' आंदोलन के जरिए अपना आक्रोश जताया. इस दौरान किसानों ने सूखी सोयाबीन की फसल और सरकार के विवादित जीआर की होली जलाकर विरोध दर्ज कराया. मांजरा नदी के मैदानी इलाके को बीड जिले का ग्रीनबेल्ट माना जाता है. किसानों के मुताबिक, पिछले साल इसी समय भारी बारिश और बाढ़ से खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई थीं. इस साल मानसून की कमी के कारण इलाके में सूखे जैसे हालात हैं. सोयाबीन और कपास की फसलें खेतों में सूख गई हैं, जबकि गन्ने की बढ़वार भी प्रभावित हुई है.

सोयाबीन में दाना नहीं, फलियां भी सूखी

प्रदर्शन में शामिल किसानों ने कहा कि सूखे की वजह से सोयाबीन की फलियां गिर गई हैं और फसल में दाना भरने की स्थिति नहीं बन पाई. किसानों का कहना है कि खेती पर पहले ही लागत खर्च हो चुकी है और कई किसानों ने इसके लिए कर्ज भी लिया है. ऐसे में फसल खराब होने से उनकी आर्थिक मुश्किल और बढ़ गई है. 

एक किसान ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से सब्सिडी और सहायता के ऐलान किए जा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा है. किसान ने कहा क‍ि सरकारी दफ्तरों में जाने पर उन्हें अलग-अलग कागजी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि पहले कृषि मंत्री पवार के कार्यकाल में उन्हें सीधे दो बार आर्थिक सहायता मिली थी, जबकि अब सहायता पाने की प्रक्रिया काफी जटिल हो गई है.

जीआर को लेकर भी किसानों में नाराजगी

शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के पूर्व तालुका प्रमुख मदन परदेशी ने कहा कि सरकार की ओर से जारी जीआर किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है. उन्होंने बताया कि सोयाबीन की फसल खेतों में खड़ी तो दिखाई दे रही है, लेकिन उसमें दाना नहीं भर रहा है. पिछले साल ओलावृष्टि और धनेगांव बांध के पानी से फसलों को नुकसान हुआ था, जबकि इस साल सूखे ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है.

एक एकड़ के लिए 50 हजार रुपये की मांग

मदन परदेशी ने कहा कि किसानों की मांग है कि सरकार सोयाबीन जैसी फसलों के नुकसान के लिए प्रति एकड़ 50 हजार रुपये की मदद दे. उन्होंने गन्ना किसानों के लिए प्रति एकड़ एक लाख रुपये की सहायता की मांग भी रखी. किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से पर्याप्त मदद नहीं मिलने के कारण उनका गुस्सा बढ़ रहा है.

गन्ने की बढ़वार भी प्रभावित

मांजरा क्षेत्र के किसान नाना ढगे ने कहा कि सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है और गन्ने की हालत भी खराब है. उन्होंने कहा कि गन्ने की बढ़वार रुक गई है और किसानों को फसल पर किया गया खर्च वापस मिलने की उम्मीद कम है. उन्होंने सरकार से मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जल्द सहायता शुरू करने की मांग की.

नाना ढगे ने कहा कि फसल खराब होने के कारण किसानों के सामने पशुओं के चारे की समस्या भी खड़ी हो सकती है. उन्होंने सरकार से किसानों के नुकसान का आकलन कर बिना कठिन शर्तों के जल्द राहत देने की मांग की. किसानों ने मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाने की अपील की.

लगातार दूसरे साल मौसम की मार

मांजरा क्षेत्र के किसानों की स्थिति लगातार दूसरे साल मौसम की मार से प्रभावित हुई है. पिछले साल बाढ़ और भारी बारिश ने खेती को नुकसान पहुंचाया था, जबकि इस साल कम बारिश और सूखे जैसे हालात से खरीफ फसलों पर संकट खड़ा हो गया है. किसानों ने सरकार से नुकसान का जल्द आकलन कर आर्थिक सहायता देने की मांग की है.

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