
महाराष्ट्र के जालना जिले में बारिश की कमी ने मोसंबी उत्पादक किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पिछले दो से तीन महीने से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कई इलाकों में मोसंबी के बागान सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं. पानी की कमी से पेड़ों पर लगे फल बड़ी संख्या में झड़ रहे हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है. जिले में नदियों, नालों और कुओं का जलस्तर भी घट रहा है. कई कुओं में पानी कम होने और कुछ के सूखने की स्थिति के कारण किसानों के सामने बागानों की सिंचाई करना बड़ी चुनौती बन गया है.
जालना जिले की अंबड तहसील के किनगांववाड़ी गांव में सूखे का असर मोसंबी के बागानों पर साफ दिखाई दे रहा है. यहां किसान अरुणाबाई सिहिरे ने वर्ष 2019 में दो एकड़ जमीन पर मोसंबी के करीब 400 पेड़ लगाए थे. उन्होंने बागान तैयार करने और उसकी देखभाल पर लगातार खर्च किया है. इस साल भी खाद, पानी और रखरखाव पर करीब एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च किए गए. इसके बावजूद बारिश नहीं होने से उनका कुआं सूख गया और पेड़ों को पर्याप्त पानी देना मुश्किल हो गया है.
अरुणाबाई सिहिरे को इस साल बागान से पांच से छह लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद थी. हालांकि, पानी की कमी के कारण पेड़ सूख रहे हैं और फल झड़ने से संभावित उत्पादन पर असर पड़ रहा है. इससे उनकी आमदनी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. खेती के साथ पशुओं के लिए चारे की समस्या भी बढ़ गई है. उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता देने की मांग की है.
वहीं, किनगांववाड़ी की किसान राधाबाई सिहिरे भी बारिश की कमी से परेशान हैं. वह पिछले पांच से छह साल से दो एकड़ जमीन पर मोसंबी का बागान संभाल रही हैं. बागान तैयार करने और उसकी देखभाल पर वह करीब डेढ़ से दो लाख रुपये खर्च कर चुकी हैं. उन्हें इस साल छह से सात लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद थी. लेकिन कुओं में पानी की कमी के कारण पेड़ों की सिंचाई नहीं हो पा रही है और बागान सूखने की कगार पर पहुंच गया है.
राधाबाई सिहिरे के सामने अब फसल बचाने के साथ बागान पर किए गए निवेश की भरपाई की चिंता भी है. बारिश के अभाव में उत्पादन प्रभावित होने से इस साल अपेक्षित कमाई की संभावना कम हो गई है. उन्होंने सरकार से आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की मांग की है.
गांव के किसान उदल सिहिरे ने कहा कि उनके इलाके में करीब तीन महीने से बारिश नहीं हुई है. उनके दो एकड़ के बागान में मोसंबी के लगभग 400 पेड़ हैं. इस साल उन्होंने बागान पर करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च किए हैं और लगभग दो लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद थी. लेकिन पानी की कमी के कारण पेड़ सूख रहे हैं और फसल को बचाना मुश्किल हो गया है.
उदल सिहिरे का कहना है कि कुएं में पानी नहीं बचा है. बाहर से पानी खरीदकर लाने के लिए भी उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं. गांव में पानी के टैंकरों की उपलब्धता भी नहीं हो पा रही है. ऐसे में बागान को बचाने के लिए उनके पास सीमित विकल्प रह गए हैं. उन्हें आशंका है कि इस बार बागान पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो सकता है. उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता देने की अपील की है.
जालना जिले में बारिश की कमी के कारण मोसंबी उत्पादक किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है. एक ओर पानी की कमी से पेड़ों और फलों को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर खाद, सिंचाई और बागानों की देखभाल पर किया गया खर्च भी वसूल होने की उम्मीद कम होती जा रही है.
फलों के झड़ने से उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है. ऐसे में किसानों को इस साल अपेक्षित आमदनी नहीं मिलने का डर सता रहा है. प्रभावित किसानों ने सरकार से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे अपने बागानों को बचाने और बढ़ते नुकसान से उबरने की कोशिश कर सकें.