
रोहतक में आज तड़के सुबह लगभग तीन बजे के बाद मौसम ने अचानक करवट ली. बादलों की गड़गड़ाहट के साथ शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में बारिश शुरू हो गई. कई दिनों से ठंड और हल्की धुंध के बाद हुई इस बारिश से मौसम में एक बार फिर बदलाव देखने को मिला. मौसम विभाग द्वारा पहले ही आज बारिश की संभावना जताई गई थी, जो सुबह-सुबह सही साबित हुई. बारिश की तीव्रता अधिक नहीं रही, लेकिन लंबे समय बाद हुई इस बारिश को लेकर किसानों में मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है. खासतौर पर गेहूं की फसल उगा रहे किसानों के लिए यह बारिश काफी हद तक फायदेमंद मानी जा रही है.
किसानों ने कहा कि इस समय गेहूं की फसल बढ़वार की अवस्था में है और हल्की से मध्यम बारिश फसल के लिए अमृत समान होती है. इससे खेतों में नमी बनी रहेगी, जड़ों को मजबूती मिलेगी और दानों का विकास बेहतर होगा. साथ ही सिंचाई पर होने वाला खर्च भी बचेगा. किसानों ने बताया कि अब कुछ दिनों तक डीजल और बिजली से सिंचाई कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे लागत कम होगी.
हालांकि, सभी किसानों के लिए यह बारिश पूरी तरह लाभकारी नहीं मानी जा रही. जिन खेतों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है, वहां जलभराव से फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. वहीं, जिन किसानों ने हाल ही में गेहूं की बिजाई की है, उनके लिए यह बारिश परेशानी का कारण बन सकती है.
किसानों का कहना है कि अगर बारिश सीमित मात्रा में रहती है तो यह गेहूं की पैदावार बढ़ाने में सहायक होगी, लेकिन लगातार या अत्यधिक बारिश होती है तो फसल में रोग लगने और उत्पादन प्रभावित होने की संभावना भी बनी रहेगी. जिले में हुई सुबह की बारिश मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुरूप रही और किसानों के लिए राहत और चिंता दोनों लेकर आई है. अब किसानों की नजर आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर टिकी हुई हैं.
उधर, राजस्थान के जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाकों में साल 2026 की शुरुआत किसी बर्फीले एहसास से कम नहीं रही. जहां एक ओर पूरा देश नए साल के जश्न में डूबा था, वहीं सीमावर्ती जैसलमेर जिले सहित आसपास के नहरी क्षेत्रों में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण साल के पहले दिन, गुरुवार को जैसलमेर शहर से लेकर सरहदी गांवों तक घना कोहरा छाया रहा. कड़ाके की ठंड और दृश्यता कम होने के कारण जनजीवन की रफ्तार धीमी पड़ गई.