हरियाणा की मंडियों में बारिश का कहर: धान भीगा, खरीद लटकी... MSP तो दूर, फसल बिकना भी मुश्किल

हरियाणा की मंडियों में बारिश का कहर: धान भीगा, खरीद लटकी... MSP तो दूर, फसल बिकना भी मुश्किल

हरियाणा के करनाल और गोहाना की अनाज मंडियों में बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मंडियों में धान भीग रहा है, जलभराव की स्थिति है और खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई है. किसानों का आरोप है कि समय पर सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई और राइस मिलरों की कमी के कारण उनकी फसल मंडियों में अटकी हुई है.

Haryana Paddy ProcurementHaryana Paddy Procurement
कमलदीप
  • करनाल/गोहाना ,
  • Oct 15, 2026,
  • Updated Oct 15, 2026, 5:53 PM IST

हरियाणा में बेमौसम बारिश ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है. करनाल और गोहाना की अनाज मंडियों में बारिश के कारण धान की फसल भीग गई है, जबकि खरीद प्रक्रिया भी प्रभावित होती दिखाई दे रही है. किसानों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन ने समय रहते खरीद व्यवस्था नहीं बनाई, जिसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है.

करनाल अनाज मंडी में अपनी धान की फसल लेकर पहुंचे किसानों ने कहा कि मौसम की मार के साथ-साथ प्रशासनिक लापरवाही भी उनकी परेशानी का बड़ा कारण है. किसानों का कहना है कि यदि सरकारी खरीद समय पर शुरू हो जाती तो आज उनकी फसल खुले में बारिश के बीच नहीं पड़ी होती.

एक किसान ने कहा कि सरकार को धान की खरीद कम से कम दो महीने पहले शुरू करनी चाहिए थी. उनका आरोप है कि बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर सुविधाएं दिखाई नहीं देतीं. किसान ने बताया कि मंडी के शेडों में पहले से भरी बोरियां रखी हुई हैं, जबकि किसानों की नई फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी है और बारिश में भीग रही है.

किसानों के अनुसार वे ठरी गांव से तीन ट्रॉली धान लेकर मंडी पहुंचे थे, जबकि गांव के अन्य किसान भी कई ट्रॉली फसल लेकर आए हैं, लेकिन अब तक उनकी फसल नहीं बिक पाई है. किसानों का कहना है कि बारिश से न केवल क्वालिटी प्रभावित होगी, बल्कि आगे चलकर नमी का हवाला देकर कीमतें भी कम की जा सकती हैं.

राइस मिलरों की कमी से भी बढ़ी परेशानी

करनाल मंडी में मौजूद किसानों ने दावा किया कि मंडी में धान खरीदने के लिए पर्याप्त राइस मिलर नहीं हैं. किसानों के मुताबिक, सरकार और प्रशासन को मिलरों के साथ खरीद संबंधी व्यवस्थाएं काफी पहले पूरी कर लेनी चाहिए थीं, लेकिन यह काम सीजन शुरू होने के बाद किया जा रहा है.

किसानों ने कहा कि खरीफ मार्केटिंग सीजन का बड़ा हिस्सा गुजर चुका है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में धान मंडियों में पड़ा हुआ है. उनका आरोप है कि अधिकांश किसानों की फसल अभी तक सरकारी समर्थन मूल्य पर नहीं बिक पाई है. किसानों का कहना है कि चाहे बारिश हो या खरीद में देरी, हर स्थिति में नुकसान किसान को ही उठाना पड़ता है.

गोहाना मंडी में जलभराव, पानी में भीगा धान

वहीं, सोनीपत जिले के गोहाना में सुबह हुई तेज बारिश ने हालात और खराब कर दिए. आसमान में घने बादल छाए रहने के बीच हुई बारिश से शहर की सड़कों पर पानी भर गया. गोहाना की अनाज मंडी में भी जलभराव हो गया, जिससे बिक्री के लिए लाई गई धान की ढेरियां भीग गईं.

किसानों का आरोप है कि मंडी में बारिश के पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. उनका कहना है कि कुछ दिन पहले हुई बारिश से भी धान प्रभावित हुई थी और अब दोबारा हुई बारिश ने नुकसान की आशंका बढ़ा दी है.

किसानों के मुताबिक, जब तक भीगा हुआ धान पूरी तरह सूखेगा नहीं, तब तक सरकारी एजेंसियां और राइस मिलें खरीद करने से बच सकती हैं. इससे मंडियों में फसल की निकासी और धीमी होने की आशंका है.

खेतों में तैयार फसल को भी खतरा

बारिश का असर सिर्फ मंडियों तक सीमित नहीं है. कई इलाकों में खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल तेज हवाओं और बारिश के कारण गिर गई है. किसानों को डर है कि इससे उत्पादन और क्वालिटी दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कटाई पर होने वाले खर्च के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ता है. ऐसे में यदि फसल खराब हो जाए या उचित दाम न मिले तो आर्थिक संकट और गहरा सकता है.

किसानों ने सरकार से मांग की है कि मंडियों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था की जाए, भीगी फसल की खरीद सुनिश्चित हो और बारिश से प्रभावित किसानों को राहत दी जाए. उनका कहना है कि मौसम की मार और बाजार की चुनौतियों के बीच किसान दोहरी चोट झेल रहा है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और सरकार किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाते हैं.(रोहतक से सुरेंदर सिंह का इनपुट)

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