
गाय दूध देना बंद कर दें तो उसे छुट्टा छोड़ दिया जाता है. भैंस दूध देना बंद कर दे तो उसे स्लॉटर हाउस में बेच दिया जाता है. इसी तरह से जब ब्रीडर बुल किसी काम का नहीं रहता है तो उसे भी बेच दिया जाता है. कुछ लोग खेती के काम में माल ढुलाई के लिए ऐसे बुल को खरीद लेते हैं. लकड़ी से बनी गाड़ी में ऐसे बुल को जोत दिया जाता है. बेशक ऐसे बुल उत्पादन बंद कर देते हैं, लेकिन उन्हें भी मेहनत के हिसाब से खुराक चाहिए होती है. क्योंकि ऐसा नहीं है कि ब्रीडर बुल को खेती के काम में लगा दिया है तो अब उसकी खुराक जो चाहें दे दें.
एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो एक खास उम्र तक आते-आते ब्रीडर बुल की गुणवत्ता कमजोर पड़ने लगती है. कुछ ऐसे भी बुल होते हैं जिनमे शुरू से ही ब्रीडर बनने की क्वालिटी नहीं होती है. इसकी कई वजह हो सकती है. ऐसे बुल को खेती-किसानी और उससे जुड़े ट्रांसपोर्ट के काम में ले लिया जाता है. लेकिन इनकी खुराक पर भी खास ध्यान देने की जरूरत होती है.
सीआईआरबी के मुताबिक दिन में चार घंटे काम करने वाले बुल के लिए इसे हल्का काम कहा जाता है. इसके लिए खासतौर पर खुराक का चार्ट बनाया गया है. लेकिन बुल का वजन 550 किलो होना चाहिए.
अगर कोई बुल दिनभर में आठ घंटे काम करता है तो उसे भारी काम करने की कैटेगिरी में रखा जाता है. अगर ऐसे बुल का वजन 550 किलो है तो उसे इस प्रकार से खुराक दी जाएगी.
ये भी पढ़ें-
Analog Paneer: AIIMS की डॉ. पिंकी बोलीं खा सकते हैं एनालॉग पनीर, लेकिन ध्यान रखें ये बात
Honey Production: शहद उत्पादन में आगे बढ़ रहा, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कम हुए दाम