
महाराष्ट्र में कम बारिश और सूखे जैसे हालात का असर अब पोल्ट्री कारोबार पर भी दिखने लगा है. राज्य के पोल्ट्री किसान बढ़ती लागत, पानी की कमी और कमजोर मांग की चिंता से परेशान हैं. सबसे बड़ी समस्या मक्का के महंगे होने की है, जो मुर्गियों के दाने का एक प्रमुख हिस्सा है. मक्का की कीमत बढ़ने से मुर्गी और अंडा उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है.
पोल्ट्री किसानों के मुताबिक, पिछले साल मक्का करीब 18 से 20 रुपये प्रति किलो मिल रहा था. लेकिन इस साल फसल को हुए नुकसान और कम उत्पादन के कारण इसकी कीमत बढ़कर करीब 28 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है. पोल्ट्री किसान और राज्य सरकार के कृषि भूषण पुरस्कार से सम्मानित शिवाजी क्षीरसागर ने बताया कि मक्का की बढ़ी कीमत का सीधा असर पोल्ट्री फार्म की लागत पर पड़ रहा है. उनके मुताबिक, पिछले साल की तुलना में मक्का करीब 8 से 10 रुपये प्रति किलो महंगा हो गया है, जबकि अंडे की कीमत में केवल एक या दो रुपये का ही इजाफा हुआ है.
बढ़ती लागत के कारण पोल्ट्री किसानों के सामने अब उत्पादन कम करने की स्थिति बन सकती है. शिवाजी क्षीरसागर के फार्म में करीब एक लाख मुर्गियां रखने की क्षमता है. लेकिन चारे और दूसरी लागत बढ़ने के कारण वह भी मुर्गियों की संख्या कम करने पर विचार कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि अगर उत्पादन लागत लगातार बढ़ती रही और मुर्गी या अंडे की कीमत उसी हिसाब से नहीं बढ़ी तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में किसान चूजों की संख्या कम करके खर्च घटाने की कोशिश कर सकते हैं.
महाराष्ट्र में सूखे का असर केवल चारे की कीमत तक सीमित नहीं है. पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. लेकिन बारिश कम होने के कारण कई इलाकों में पानी के स्रोत तेजी से कम हो रहे हैं. पोल्ट्री ब्रीडर्स एंड फार्मर्स एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र के अध्यक्ष संजय नालगीरकर ने बताया कि पानी की उपलब्धता अब पोल्ट्री किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गई है. इसके साथ ही ज्यादा गर्मी और नमी के कारण चूजों की बढ़त पर भी असर पड़ रहा है.
पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, मौजूदा मक्का का स्टॉक लगभग खत्म होने की स्थिति में है. नवंबर में नई मक्का की आवक शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन इस बार फसल को काफी नुकसान हुआ है. इसलिए नई फसल की मात्रा भी कम रहने की आशंका है. इससे आने वाले महीनों में मक्का की कीमत और बढ़ सकती है. अगर महाराष्ट्र में पर्याप्त मक्का नहीं मिला तो किसानों को दूसरे राज्यों से चारा मंगाना पड़ेगा.
महाराष्ट्र में मक्का की कमी होने पर किसान उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से मक्का मंगा सकते हैं. लेकिन दूसरे राज्यों से चारा लाने में परिवहन का खर्च भी जुड़ जाएगा. पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि परिवहन लागत बढ़ने के कारण मक्का की कीमत 30 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा हो सकती है. इससे पोल्ट्री फार्म चलाने का खर्च और बढ़ जाएगा.
चारे, पानी और दूसरी लागत बढ़ने का असर ब्रॉयलर चिकन की कीमत पर भी पड़ा है. महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में ब्रॉयलर चिकन की कीमत करीब 125 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. सितंबर पिछले साल में यह कीमत करीब 100 रुपये प्रति किलो थी. यानी एक साल में ब्रॉयलर चिकन की कीमत में करीब 25 रुपये प्रति किलो का अंतर आया है. कारोबारियों के मुताबिक, इसके पीछे बढ़ती उत्पादन लागत एक बड़ी वजह है.
सूखे का असर किसानों और ग्रामीण परिवारों की कमाई पर भी पड़ सकता है. ऐसे में पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोगों को डर है कि ग्रामीण इलाकों में लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो सकती है. अगर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय पर दबाव बढ़ता है तो अंडे और चिकन की मांग भी प्रभावित हो सकती है. इससे एक तरफ किसानों की उत्पादन लागत बढ़ेगी और दूसरी तरफ बिक्री पर दबाव आ सकता है.
पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि सूखे का पूरा असर आने वाले महीनों में ज्यादा दिखाई दे सकता है. मक्का की महंगी कीमत, पानी की कमी, गर्मी और उत्पादन खर्च बढ़ने से किसानों के सामने मुश्किलें बढ़ रही हैं. अगर मक्का की नई फसल कम आती है और कीमत में और बढ़ोतरी होती है, तो पोल्ट्री किसानों को उत्पादन कम करने का फैसला लेना पड़ सकता है. इससे राज्य में अंडे और चिकन की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना है. (PTI)
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