
Cow-Buffalo Journey पंजाब-हरियाणा से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड-बिहार और तमिलनाडू तक गाय-भैंस जाती हैं. कुछ वक्त पहले तक ट्रेन से गाय-भैंस भेजी जाती थीं. लेकिन बाद में इस सुविधा को बंद कर दिया गया. अब ट्रक से पशु कारोबारी गाय-भैंस को दक्षिण भारत के राज्यों तक ले जाते हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि इस दौरान सैकड़ों किमी की दूरी गाय-भैंस खड़े-खड़े ही तय करती हैं. बीच में कहीं एक-दो जगह जरूर उन्हें ट्रक से उतारकर आराम कराया जाता है. लेकिन बहुत सारे पशुपालक तो ये भी नहीं करते हैं.
जिसके चलते पशुओं के बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है. उनका दूध उत्पादन भी घट सकता है. ऐसे में एनिमल एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पशु की यात्रा के दौरान और डेयरी फार्म पर पहुंचने के बाद एक्सपर्ट के बताए कुछ जरूरी काम बाड़े में जरूर कर लें. पशुओं को लंबी यात्रा कराने के बाद ये जरूरी है कि उन्हें बीमारी और तनाव से बचाने के लिए कुछ उपाय अपनाए जाएं. एनिमल एक्सपर्ट भी पशुओं की यात्रा के दौरान और उसके बाद से संबंधित एडवाइजरी भी जारी करते हैं.
पशुओं की लंबी यात्रा के बाद एक्सपर्ट के बताए उपाय तो अपनाए ही जाने चाहिए, साथ में यात्रा के दौरान भी कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए. जिस वाहन से पशु को यात्रा कराई जा रही है उसमे पशु के खड़े होने और उसके हिलने-ढुलने के लिए पूरी जगह होनी चाहिए. यात्रा ज्यादा लंबी हो तो बीच में पशु को ब्रेक देना चाहिए.