Animal Care in Monsoon: रोजाना करें गाय-भैंस का खरहेरा, इस मौसम में नहीं घटेगा दूध उत्पादन

Animal Care in Monsoon: रोजाना करें गाय-भैंस का खरहेरा, इस मौसम में नहीं घटेगा दूध उत्पादन

Animal Care in Monsoon खुजली जैसी मामूली बीमारी भी गाय-भैंस समेत सभी तरह के पशुओं को परेशान करती है, इसीलिए एक्सपर्ट हर रोज पशु का खरहेरा (ब्रश से मालिश) करने की सलाह देते हैं. क्योंकि खुजली होने पर पशु ना सिर्फ शारीरिक रूप से परेशान होता है, बल्कि मानसिक तौर पर उसका तनाव बढ़ जाता है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 22, 2026,
  • Updated Jul 22, 2026, 12:30 PM IST

बरसात के दिनों में पशुओं को कई तरह की परेशानी होती है. इसमे सबसे ज्यादा परेशानी संक्रमण के चलते होती है. संक्रमण के चलते ही पशुओं यानि गाय-भैंस को त्वचा संबंधी बीमारियां भी होती हैं. खुजली इसी में से एक है. यही वजह है कि एनिमल एक्सपर्ट खासतौर पर बरसात के दिनों में गाय-भैंस का हर रोज खरहेरा करने की सलाह देते हैं. खरहेरा ब्रश से पशुओं के शरीर की मालिश करने को कहा जाता है. एक्सपर्ट की मानें तो खुजली होने पर पशु तनाव में आ जाते हैं. और जब पशु तनाव में आते हैं तो इसका सीधा असर उनके दूध उत्पादन पर पड़ता है. 

बरसात के दौरान पशुओं में खुजली की असल वजह मच्छर और मक्खी होते हैं. हालांकि ऐसा भी नहीं है कि गाय-भैंस सिर्फ मानसून में ही खुजली से परेशान होते हैं. सर्दियों में भी त्वचा खुश्क होने की वजह से पशुओं को खुजली होने लगती है. और कई बार तो मामूली सी दिखने वाली खुजली के चलते पशुओं के शरीर पर जख्म तक हो जाते हैं. 

खुजली होने पर खूंटे से न बांधे   

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि गाय-भैंस, भेड़-बकरी, घोड़ा, ऊंट और याक समेत और भी दूसरे पालतू पशुओं को खासकर बरसात के दिनों में खुजली की बीमारी हो जाती है. हमारे यहां पशु की बात तो छोडि़ए इंसानों में भी इसे बेहद मामूली समझा जाता है. यही वजह है कि जब तक खुजली पशु में घाव या किसी बड़े इंफेक्शन का रूप नहीं ले लेती है तब तक पशुपालक उस पर गौर नहीं करते हैं.

हालांकि शरीर के कुछ हिस्सों की खुजली को तो सभी छोटे-बड़े पशु खुद से ही दूर करने की कोशिश करते हैं. लेकिन शरीर के कुछ ऐसे हिस्से में खुजली होने लगती है जहां जानवर अपने पैर या पूंछ का इस्तेमाल नहीं कर पाता है. अब अगर ऐसे में वो पशु शेड में खूंटे से बंधा है तो उसके लिए ये और भी मुश्किल वाला वक्त होता है. इस दौरान पशु अपने आसपास ऐसी चीज तलाश करता है जिससे वो अपनी खुजली दूर कर सके. 

और अगर पशु खुला हुआ है तो फिर वो कभी पेड़ से, कभी दीवार से तो कभी लोहे के तार की बाड़ से अपनी शरीर को रगड़कर खुजली दूर करने की कोशिश करता है. ऐसा करने के चलते ही पशु कई बार लोहे के तार या कांटों वाले झाड़ से खुजाकर अपने को घायल कर लेता है. लोहे के तार से पशु के शरीर पर जख्म हो जाता है. जंग लगे लोहे से घाव होने पर पशु के शरीर में टिटनेस का इंफेक्शन फैल जाता है. 

खुजली की वजह से छूट जाता है खाना-पीना 

एक्सपर्ट का कहना है कि पशु छोटा हो या बड़ा जब उसे खुजली होती है तो उसका असर उसके दिमाग पर भी होता है. पशु परेशान रहने लगता है. वो ठीक से अपनी खुराक भी नहीं खा पाता है. पशु पूरी तरह से तनाव में आ जाता है. और इन्हीं सब परेशानियों के चलते ही पशु का दूध उत्पादन कम हो जाता है. 

खरहेरा के लिए करें ब्रश का इस्तेमाल 

एक्सपर्ट की मानें तो पशु को खुजली हो या ना हो, लेकिन दिन में एक बार पशु का खरहेरा जरूर करना चाहिए. ऐसा करने से पशु को बड़ा आराम मिलता है. पशु का तनाव भी दूर होता है. एक ब्रश की मदद से खरहेरा किया जा सकता है. अब तो बाजार में इस तरह के ब्रश भी आ रहे है जिनकी मदद से पशु खुद ही अपने शरीर की मालिश कर लेते हैं. बाजार में ब्रश की कीमत 40 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक है. बाजार में मैक्सी, मिडी, मिनी और टोटम चार तरह के ब्रश मौजूद हैं. 

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