Future Milk: फ्यूचर मिल्क पर होगी चर्चा, भेड़-बकरी, ऊंट, याक पालन को दिया जाएगा बढ़ावा

Future Milk: फ्यूचर मिल्क पर होगी चर्चा, भेड़-बकरी, ऊंट, याक पालन को दिया जाएगा बढ़ावा

Future Milk बच्चे ही नहीं बड़ों की बहुत सारी बीमारियों में भी सीधे पीने पर बकरी का दूध फायदा पहुंचाता है. ऊंटनी के दूध के भी बहुत फायदे हैं. सभी तरह के दूध और दूध से बनने वाले प्रोडक्ट पर खास रिसर्च करने वाला नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई), करनाल भी फ्यूचर मिल्क को लेकर हो रही चर्चा में अहम रोल निभा रहा है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 14, 2026,
  • Updated Jan 14, 2026, 11:49 AM IST

Future Milk फ्यूचर मिल्क की चर्चा तेज होती जा रही है. फ्यूचर मिल्क को सिर्फ एक दूध के रूप में ही नहीं दवाई के तौर पर भी देखा जा रहा है. साथ ही इस बहाने उन पशुओं के पालन को बढ़ावा देने की भी कोशि‍श हो रही है जो संख्या में घट रहे हैं. ऊंट और याक इसका बड़ा उदाहरण है. बीते कुछ वक्त पहले नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई), करनाल, हरियाणा में भी फ्यूचर मिल्क को लेकर चर्चा हो चुकी है. और अगर अब की बात करें तो आने वाली फरवरी में फ्यूचर मिल्क को लेकर एक बड़ी चर्चा होने जा रही है. 

तीन दिन 9 से 11 फरवरी तक ये चर्चा आनंद, गुजरात में होगी. नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) और इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (आईडीएफ) मिलकर इस कार्यक्रम को आयोजित कर रहे हैं. एनिमल रिसर्च और डेयरी सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि देश के कुछ प्राचीन पशु जिनका इस्तेमाल कई तरह के काम में किया जाता था उनकी संख्या अब घटने लगी है. ऐसे में उनको बचाने के लिए एक मात्रा रास्ता दूध ही बचता है. अगर उनके दूध की डिमांड बढ़ जाए तो पशुपालक उन्हें पालने में भी दिलचस्पी दिखाएंगे. 

इसलिए चर्चा में आया फ्यूचर मिल्क 

  • नॉन बोवाइन के मुकाबले गाय-भैंस के दूध में कम मेडिशनल वैल्यू होती है. 
  • नॉन बोवाइन के मुकाबले गाय-भैंस पालन में लागत ज्यादा आती है. 
  • बकरी, भेड़, ऊंटनी, गधी और याक के दूध में मेडिशनल वैल्यू ज्यादा होती है. 
  • भारत में नॉन बोवाइन की संख्या बढ़ रही है इसलिए दूध इस्तेमाल करने पर जोर है. 
  • नॉन बोवाइन का दूध और दूध से बने प्रोडक्ट इंसानी खानपान में जरूरी है. 
  • गधी के दूध को फूड में शामिल करने के लिए NDRI ने FSSAI को लैटर लिख चुका है.   
  • बेशक संख्या कम है, लेकिन फ्यूचर मिल्क में याक भी शामिल है. 
  • जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में याक पालन किया जा रहा है. 
  • याक के दूध से बने पनीर की देश से ज्यादा विदेशों में डिमांड है. 
  • आज राजस्थान से ज्यादा भेड़ों की संख्या दक्षि‍ण भारत के राज्यों में है. 
  • भेड़ और बकरी दो ऐसे पशु हैं जो दोहरा फायदा कराते हैं. 
  • इनके मीट की डिमांड भी बहुत है, जबकि भेड़ तो ऊन भी देती है. 
  • देश के कुछ प्राचीन पशुओं को बचाने की कोशि‍श की जा रही है. 
  • ऐसे पशुओं को बचाने के लिए एक मात्र रास्ता दूध है. 
  • दूध की डिमांड बढ़ जाए तो पशुपालक उन्हें पालने में भी दिलचस्पी दिखाएंगे.

फ्यूचर मिल्क पर और हो रिसर्च

NDRI के डायरेक्टर डॉ. धीर सिंह का कहना है कि आज मानव स्वास्थ्य के लिए लिपिड, लैक्टोज, इम्युनोग्लोबुलिन, विभिन्न पेप्टाइड्स, न्यूक्लियोटाइड्स, ओलिगोसेकेराइड और मेटाबोलाइट्स आज की भागम भाग वाली जिंदगी और खानपान में ये बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं. और इनकी पूर्ति नॉन बोवाइन पशुओं के दूध से हो सकती है. बस जरूरत इतनी है कि हम दूध में इनकी तलाश करें.

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