महाराष्ट्र में बढ़ा चारा संकट, अकोला से दूसरे ज‍िले में चारा ले जाने पर लगी रोक

महाराष्ट्र में बढ़ा चारा संकट, अकोला से दूसरे ज‍िले में चारा ले जाने पर लगी रोक

अकोला जिले में उत्पादित चारा, मुर्गी फीड एवं टोटल मिक्स राशन (टीएमआर) को दूसरे जिलों में ले जाने पर रोक लगा दी गई है. ताक‍ि आने वाले समय में ज‍िले में चारे का संकट और बड़ा न हो. ऐसी ही रोक परभणी जिले में भी लागू की गई है. राज्य में सूखे की वजह से बढ़ा है संकट. 

गंभीर होने लगी चारे की समस्या गंभीर होने लगी चारे की समस्या
सर‍िता शर्मा
  • Akola,
  • Feb 21, 2024,
  • Updated Feb 21, 2024, 4:12 PM IST

कम बारिश की वजह से इस साल महाराष्ट्र में चारे का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. पानी की कमी के कारण कई जिलों में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है. इसके चलते ही चारे की भी समस्या उत्पन्न हो गई है. सूखे की वजह से ही पशुओं के चारे की समस्या भी गंभीर होने लगी है. इस बीच, अकोला जिले में चारे कमी को देखते हुए प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. जिले में उत्पादित चारा, मुर्गी फीड एवं टोटल मिक्स राशन (टीएमआर) को दूसरे जिलों में ले जाने पर रोक लगा दी गई है. ताक‍ि आने वाले समय में ज‍िले में चारे का संकट और बड़ा न हो. इसके साथ ही निर्देश दिया गया है कि जिले के बाहर के लोगों को चारे की नीलामी की अनुमति न दी जाए. ताकि जिले में चारे की कमी न हो और कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो. इससे पशुपालक किसानों को राहत मिली है.

इस साल राज्य में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई. इसका सीधा असर राज्य के 40 तालुका पर पड़ा है. यहां के 1021 राजस्व मंडलों समेत नए 224 राजस्व मंडलों में सूखे जैसी स्थिति घोषित की गई है. इसमें से अकोला जिले में सबसे ज्यादा समस्या है. यहां भी सूखे जैसे हालात घोषित कर दिए गए हैं. इसमें चारे की अधिक समस्या उत्पन्न होने की संभावना है. इसी महीने की शुरुआत में परभणी जिले में भी चारे कमी को देखते हुए प्रशासन ने ऐसा ही फैसला लेते हुए चारा, मुर्गी फीड एवं टोटल मिक्स राशन के दूसरे जिलों में ले जाने पर रोक लगा दी थी. 

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चारे की कीमतों में हुई बढ़ोतरी

राज्य में सूखे जैसी स्थिति के कारण चारे की कमी हुई है और अब पशुपालकों को चारा खरीदने के लिए इधर-उधर भागना पड़ रहा है. उसमें चारे की कीमतें आसमान छू रही हैं. इससे चारे की भारी कमी देखी जा रही है. शहर में पशुपालकों से सोयाबीन और तुरी चारा ऊंचे दाम पर पशुपालक खरीदने के लिए मजबूर हैं. नतीजा यह है कि ग्रामीण इलाकों में चारा बहुत कम बचा है. ऐसे में अब उसके लिए अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ते हैं. साथ ही दूध का दाम पहले ज‍ितना ही है. उसमें इजाफा नहीं हुआ है. 

पशुपालकों की परेशानी बढ़ी 

जनवरी माह में ही राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति घोषित कर दी गई थी. अब फरवरी के मध्य में चारे की कमी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. मूंग, उदीद, ज्वार, सोयाबीन और अरहर बुआई कम हुई है. इसका सीधा असर चारे पर भी पड़ा है. पशुपालकों का कहना है कि चारा दूर से लाना पड़ता है, जिसका खर्च बढ़ जाता है. अगर चारा न खरीदे तो पशुओं को क्या खिलाया जाए. यह सवाल पशुपालकों को परेशान कर रहा है. इसल‍िए मजबूरी में वो महंगा चारा खरीद रहे हैं. कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे चारा उत्पादन के लिए कृषि विभाग की मदद लें.

 

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