Lumpy Disease गायों की लंपी बीमारी का खौफ यूरोप तक पहुंच गया है. जिसे देखते हुए फ्रांस सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. पेरिस में हर साल एक बड़ा एग्रीकल्चर शो आयोजित किया जाता है. इस शो को देखने के लिए करीब छह लाख लोग आते हैं. स्कूली बच्चों को भी शो में बुलाया जाता है. इसमे बहुत सारे वो बच्चे भी होते हैं जिन्होंने पहली बार गाय-भैंस, भेड़-बकरी को देखा होता है. लेकिन अभी फ्रांस के एक इलाके में गायों की लंपी बीमारी फैली हुई है. फ्रांस में लंपी के 100 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. जिसे देखते हुए फ्रांस सरकार ने एग्रीकल्चर शो में गायों की एंट्री बैन कर दी है.
शो के शुंभाकर के तौर पर अब गाय की जगह दूसरा कोई पशु होगा. साथ ही और भी कई सख्त कदम उठाय गए हैं. जिसे लेकर सरकार के विरोध और समर्थन दोनों में ही लोग सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं. लंपी गायों की जानलेवा बीमारी है. ये बीमारी मच्छर और मक्खिंयों से फैलती है. भारत में भी लंपी बीमारी के केस सामने आते रहते हैं. लेकिन गायों का वैक्सीनेशन होने के चलते भारत में लंपी बीमारी कंट्रोल में रहती है.
ऐसे कम होगा लंपी का खतरा
- बीमार पशुओं को फौरन अलग कर दें.
- बीमार पशुओं का डाक्टर की सलाह पर उपचार शुरू कर दें.
- चार्ट के मुताबिक सभी पशुओं का समय पर वैक्सीनेशन कराएं.
- पशुओं के बाड़े में साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखें.
- पशुओं के बाड़े में कीटनाशक दवाई का छिड़काव करें।
- पशुओं के घाव हो रहे हों तो उन्हें एंटीसेप्टिक से साफ करें.
- पशुओं के घाव पर फ्लाई-रिपेलेंट दवाई लगाएं.
- सभी पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं.
- पशुओं को दवाई दिए जाने और वैक्सीनेशन का रिकॉर्ड रखें.
- मक्खी, मच्छर, जूं और किलनी से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करें.
- बीमार पशु को पौष्टिक चारा, मिनरल मिक्सचर और साफ पानी पिलाएं.
- संक्रमित पशु के बर्तन, रस्सी, दूध निकालने के उपकरण अलग रखें.
- बीमार पशु को अच्छी छांव और हवादार जगह पर ही रखें.
- लंपी पीडि़त पशु की मौत हो जाए तो उसके शव को गड्डे में चूना डालकर गाड़ दें.
- जहां भी लंपी बीमारी दिखाई दे तो फौरन पशु-चिकित्सक को सूचना दें.
लंपी फैलने पर न करें ये
- बीमार पशुओं को हेल्दी पशुओं के साथ कभी न रखें.
- बीमार पशुओं को खुले में न छोड़ें और बिना सुरक्षा (ग्लब्स) के घाव को न छुएं.
- बीमार पशु को हाट, मेला या एक जगह से दूसरी जगह न ले जाएं.
- गंदगी, गोबर या पानी को पशुओं के बाड़े के आसपास जमा न होने दें.
- बिना डाक्टरी सलाह के पीडि़त पशुओं को दवाइयां न दें.
- बीमार पशु का दूध, मी या दूसरे प्रोडक्ट इस्तेमाल न करें.
- कीट नियंत्रण (मक्खी मच्छर, किलनी) की अनदेखी न करें.
- पीडि़त मरे पशु को खुली जगह या तालाब-नदी के पास फेंकना-गाड़ना मना है.
- बीमार पशु को लंबी दूरी तक ले जाकर बेचने या खरीदने से बचें.
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