
कुछ मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक अल नीनो सक्रिय हो चुका है. अगर ऐसा है तो भारत में भी इसका देखने को मिलेगा. इसके असर से सिर्फ खेती ही नहीं पशुपालन भी प्रभावित होगा. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो अल नीनो के चलते पशुओं के एक खास हरे चारे पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है. अगर चारे की कटाई से जुड़े वक्त का ख्याल नहीं रखा तो ये चारा जहरीला भी हो सकता है. इसे खाकर पशुओं की मौत भी हो सकती है. हालांकि दुधारू पशु छोटा हो या बड़ा, सभी के लिए हरा चारा बहुत ज्यादा फायदेमंद बताया जाता है. खासतौर पर गर्मियों के मौसम में हरा चारा पशुओं को हीट स्ट्रेस से बचाता है.
इसी मौसम में ज्वार का हरा चारा भी होता है. अल नीनो के असर को देखते हुए ज्वार का चारा पशुओं के लिए खतरा बन सकता है. बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी, पटना के वाइस चांसलर ने इस बारे में एक चेतावनी दी है. उन्होंने बताया है कि कितने दिन की होने पर ज्वार के चारे की फसल काट लेनी चाहिए. वहीं गाय-भैंस को कब और क्या खाने को देना चाहिए. गाय-भैंस की खुराक में हरा और सूखा चारा कितना हो. अगर दाना खिलाया जा रहा है तो उसकी मात्रा कितनी होनी चाहिए.
डॉ. इन्द्रजीत सिंह का कहना है कि ज्वार का चारा आमतौर पर मार्च-अप्रैल में बोया जाता है. अल नीनो का असर भी देखने को मिल सकता है. इसके प्रभाव से बारिश कम होगी और गर्मी ज्यादा पड़ेगी. लेकिन देखने में ये आता है कि कुछ किसान इसकी कटाई 50 दिन से पहले शुरु कर देते हैं, जो एकदम गलत है. कभी भी ज्वार का चारा 50 दिन से पहले नहीं काटना चाहिए.
और दूसरी बात ये कि ज्वार के हरे चारे की सिंचाई करने में कंजूसी नहीं बरतनी चाहिए. चारे में नमी का बरकरार रहना बहुत जरूरी है. क्यों कि चारे में जैसे ही पानी की कमी होती तो उसमे एचसीएन (हाइड्रोजन साइनाइड) के तत्व पनपने लगेंगे. जब एचसीएन का लेबल 20 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम चारे से अधिक हो जाता है, ज्वार की हाइट 3 से 5 फ़ीट होती है तब ये ज्यादा हानिकारक हो जाता है.
ऐसे में जब पशु इस चारे को खाता है तो इस उसके लीवर एंजाइम समाप्त हो जाते हैं. एचसीएन पशु के शरीर में जमा होने लगता है. इससे पशु की मौत तक हो जाती है. जानकारों का कहना है कि अब तो ज्वार की कुछ ऐसी भी वैराइटी आ रही हैं जिसमे एचसीएन की मात्रा बहुत ही कम होती है.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि हरे चारे में नमी की मात्रा काफी होती है. पशु जब इस दौरान हरा चारा ज्यादा खाता है तो उसे डायरिया समेत और भी दूसरी बीमारी होने का खतरा बना रहता है. इतना ही नहीं उस चारे में मौजूद नमी के चलते ही दूध की क्वालिटी पर भी असर आ जाता है. इसलिए ये बेहद जरूरी है कि जब पशु हरा चारा खा रहा हो या बाहर चरने के लिए जा रहा हो तो पहले उसे सूखा चारा और थोड़ा बहुत मिनरल्स जरूर दें. सूखा चारा खूब खिलाने से हरे चारे में मौजूद नमी का स्तर सामान्य हो जाता है. वहीं मिनरल्स देने से दूध में फैट और दूसरी चीजों का स्तर भी बढ़ जाता है और दूध की क्वालिटी खराब नहीं होती है.
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