
ज्यादा दूध उत्पादन और पशु नस्ल सुधार में कृत्रिम गर्भाधान (एआई) मील का पत्थर साबित हो रहा है. एआई को लेकर पशुपालक जागरुक हो रहे हैं. बाजार में वीर्य (सीमन) की डिमांड बढ़ने लगी है. अब सिर्फ गाय-भैंस ही नहीं भेड़-बकरियों का भी एआई कराया जा रहा है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो एआई के अच्छे रिजल्ट भी सामने आ रहे हैं. लेकिन एआई कराते वक्त पशुपालक का अलर्ट रहना बहुत जरूरी है. एआई कराने के लिए जिस टेक्निरशियन को बुलाया गया है उससे वीर्य और जिस पशु का वीर्य है उसके बारे में कुछ सवाल करें.
वर्ना एआई आज जितना फायदेमंद है, वो जरा सी लापरवाही के चलते उससे ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है. पशुओं को एआई से गाभिन कराने से पहले ये उससे जुड़े कुछ दस्तावेज की जांच करना जरूरी है. साथ ही एआई टेक्नीशियन के उस सिस्टम की भी जांच करनी चाहिए जिसमे वो वीर्य की स्ट्रॉ लेकर आया है.
एनिमल एक्सपर्ट बताते हैं कि अक्सर बहुत सारे पशुपालक एआई कराते वक्त कुछ सवाल जानने की कोशिश नहीं करते हैं. जिसके चलते उन्हें बाद में नुकसान उठाना पड़ता है. जैसे एआई करने के लिए आने वाले टेक्नीशियन से कौन-कौन से सवाल पूछने चाहिए. सबसे पहले ये पूछना चाहिए कि टेक्नीशियन जो वीर्य लेकर आया है वो नाइट्रोजन से भरे सिलेंडर में है या नहीं.
कहीं ऐसा तो नहीं टेक्नीशियन वीर्य स्ट्रॉ को पॉकेट, थर्मोस, पानी या बर्फ में रखकर लाया हो. दूसरा सवाल पूछें कि वीर्य केंद्र का नाम वीर्य स्ट्रॉ पर लिखा है या नहीं. कहीं वो डुप्लीकेट तो नहीं है. पशुपालकों को एआई कराने से पहले उस सांड का फैमिली ट्री भी जरूर मांगना चाहिए जिसका वीर्य एआई में इस्तेमाल किया जा रहा है. फैमिली ट्री से जुड़ा दस्तावेज नियमानुसार हर टेक्नीशियन के पास होता है.
एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक एक पशु को एआई से गाभिन करने के लिए वीर्य डोज की एक स्ट्रॉ (0.25 मिलीलीटर क्षमता) की होनी चाहिए. पशु को गाभिन करने के लिए एक स्ट्रॉ काफी होती है. लेकिन कुछ खास केस में जैसे कुछ मामलों में अगर पशु की हीट का वक्त सामान्य वक्त (12-18 घंटे) से ज्यादा बढ़ा हुआ है तो ओव्यूलेशन में देरी होती है. और ऐसे मामलों में 24 घंटे के बाद दूसरे एआई की जरूरत हो सकती है.
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