Pregnant Animal Care: गाय-भैंस के गाभि‍न होते ही उसकी खुराक और शेड में करें ये बदलाव 

Pregnant Animal Care: गाय-भैंस के गाभि‍न होते ही उसकी खुराक और शेड में करें ये बदलाव 

Pregnant Animal Care क्योंकि भैंस का गर्भकाल 310 से 315 दिन तक का होता है तो इस पूरे टाइम पशु को खास देखभाल की जरूरत होती है. और भैंस गर्भ से है या नहीं इसका पता हर 20-21 दिन में इस तरह से लगाया जा सकता है कि अगर वो हीट में नहीं आए तो समझ लें कि भैंस गाभि‍न हो चुकी है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 15, 2026,
  • Updated Jan 15, 2026, 3:13 PM IST

Pregnant Animal Care गाय-भैंस के गाभि‍न होते ही जो दो जरूरी काम होते हैं वो हैं उसकी खुराक और उसके शेड में बदलाव. क्योंकि खुराक में बदलाव नहीं किया तो बच्चा हेल्दी नहीं होगा और ब्याने के बाद गाय-भैंस ज्यादा से ज्यादा दूध नहीं देगी. इसी तरह से अगर उसके शेड में जरूरी बदलाव नहीं किए गए तो उसके चोटिल होने और गर्भपात होने की आशंका बनी रहती है. इसलिए एनिमल एक्सपर्ट गाय-भैंस के गाभि‍न होते ही रोजमर्रा की कुछ खास बातों पर अमल करने की सलाह देते हैं. 

उनका ये भी कहना है कि पशु गाय-भैंस हो या भेड़-बकरी, उसके साथ जुड़ा दूध उत्पादन उसके बच्चा देने के बाद ही शुरू होता है. इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि ब्यांत में ज्यादा और अच्छी फैट का दूध लेने के लिए उसकी देखभाल के साथ ही उसे अच्छी खुराक खाने में दी जाए. अगर गर्भकाल के दौरान कोई परेशानी आए तो एक बार नजदीकी पशु चिकित्सक से भी सलाह ली जा सकती है. 

गाभि‍न गाय-भैंस को चाहिए अच्छी खुराक 

एनिमल एक्सपर्ट डॉ. डीएम राय का कहना है कि जब भैंस गाभि‍न होती है तो उसे अपने भरण-पोषण के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी खुराक की जरूरत होती है. और खासतौर पर जब आखि‍री तीन महीने चल रहे होते हैं तो गर्भ में पल रहे बच्चे की बढ़वार बहुत तेजी से होती है. और सबसे खास बात ये कि इसी महीने में भैंस अगली ब्यांत में दूध देने के लिए अपने को तैयार करती है. अगर इस दौरान खुराक देने में जरा सी भी ऊंच-नीच होती है तो उसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. साथ ही भैंस और बच्चे को कई तरह की परेशानियां भी होने लगती हैं. इसलिए जरूरी है कि भैंस की खुराक में गर्भावस्था के समय 40-50 ग्राम खनिज लवण मिश्रण जरूर शामिल करना चाहिए.

खुराक में कमी करने से होती हैं ये परेशानियां

  • खुराक कम रह जाने पर बच्चा कमजोर पैदा होता है. 
  • खुराक में जरूरी पोषक तत्व ना हो तो बच्चा अंधा भी हो सकता है.
  • पोषक तत्वों की कमी के चलते ही भैंस फूल दिखा सकती है.
  •  बच्चा देने के बाद भैंस को मिल्क फीवर हो सकता है.
  • जेर गिरने में परेशानी होती है और कई बार तो रूक जाती है.
  • बच्चेदानी में जख्म होने के साथ मवाद पड़ जाता है. 
  • ब्यांत का दूध उत्पादन भी घट जाता है.

गाभि‍न गाय- भैंस के लिए ऐसा हो शेड 

  1. 8वें महीने से गाभिन भैंस के लिए अलग से शेड तैयार करें. 
  2. भैंस के शेड में जमीन उबड़-खाबड़ और फिसलन वाली नहीं होनी चाहिए. 
  3. शेड ऐसा हो जहां भैंस को सर्दी, गर्मी और बरसात से बचाया जा सके. 
  4. शेड में हवा के लिए खि‍ड़की जरूर होनी चाहिए. 
  5. शेड में जमीन कच्ची हो और रेत भी पड़ा हो. 
  6. शेड के अंदर सीलन नहीं होनी चाहिए. 
  7. शेड के पास ही पीने का साफ पानी भी हो.

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