
Budget 2026 ‘पोल्ट्री सेक्टर लगातार ग्रोथ कर रहा है. केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल अंडे और चिकन का उत्पादन बढ़ रहा है. बावजूद इसके पोल्ट्री सेक्टर जोखिम में काम कर रहा है. एक तरफ खतरनाक बीमारी का खतरा है तो दूसरी ओर पोल्ट्री प्रोडक्ट की बढ़ती लागत भी एक बड़ा खतरा बन चुकी है. बीमारी जहां मुर्गियों की जान ले रही है, वहीं पोल्ट्री फीड की बढ़ती कीमतें पोल्ट्री छोटे पोल्ट्री फार्मर को फार्म पर ताला लगाने को मजबूर कर रही हैं.’
ये कहना है पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के ज्वाइंट सेक्रेटरी रिकी थापर का. उन्होंने केन्द्र सरकार से आने वाले बजट में पोल्ट्री फीड के लिए मक्का, सोयामील और बीमारी से निपटने के लिए वैक्सीन इंपोर्ट करने की मांग की है. साथ ही उनका ये भी कहना है कि डेयरी की तरह से सरकार पोल्ट्री में भी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बढ़ावा दे.
रिकी थापर ने बजट में डिमांड करते हुए कहा है कि सरकार को जीएम सोयाबीन मील और मक्का के इंपोर्ट की अनुमति देनी चाहिए. अगर ऐसा होता है तो पोल्ट्री सेक्टर को लागत प्रभावी और टिकाऊ तरीके से फीड के लिए कच्चे माल की सप्लाई तय हो सकेगी. जीएम सोयाबीन, सोयाबीन मील और मक्का के इंपोर्ट को यहां ऑफ या गैर-कटाई के मौसम के दौरान एक तय कोटा के साथ अनुमति दी जानी चाहिए. जिसके चलते किसानों की कीमत पर कोई असर न पड़े. पोल्ट्री फीड में इन सामग्रियों पर जल्द से जल्द इंपोर्ट डयूटी में कमी की की जानी चाहिए.
रिकी थापर का कहना है कि वित्त मंत्री की बजट घोषणा में पोल्ट्री पक्षियों में बीमारी कंट्रोल करने के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. मौजूदा सालों में कुछ राज्यों में लो पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लूएंजा (LPAI) के फैलने की कुछ रिपोर्टें सामने आई हैं, जो इस सेक्टर की ग्रोथ के लिए एक बड़ी चुनौती है. सरकार को HPAI के लिए भी वैक्सीन के इंपोर्ट की इजाज़त देनी चाहिए. साथ ही पोल्ट्री सेक्टर की ग्रोथ की संभावनाओं का फायदा उठाने के लिए रिटेल लेवल पर कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. इंडस्ट्री में वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने के लिए आसान लोन देना समय की जरूरत है, जिससे वेट मार्केट को स्टोरेज सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया जा सके.
रिकी थापर ने किसान तक को बताया कि पोल्ट्री सेक्टर एग्रीकल्चर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. पोल्ट्री आज भारतीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और फूड सिक्योरिटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. साल 2025-26 में इंडियन पोल्ट्री सेक्टर मजबूत डिमांड के साथ लगातार बढ़ रहा है. भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक देश है. वहीं अगर ब्रॉयलर मीट उत्पादन की बात करें तो भारत का नंबर पांचवा है. यही वजह है कि पोल्ट्री सेक्टर का बाजार 350 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का हो गया है. पोल्ट्री सेक्टर में ये बढ़ोतरी प्रोटीन की बढ़ती मांग, शहरीकरण और पोल्ट्री प्रोडक्ट की बढ़ती खपत जैसी वजहों के चलते हो रही है.
रिकी थापर का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन के चलते मक्का की डिमांड में तेती आई है. इसके चलते मक्का की कीमतों में उछाल आया है. मक्का में हुए इस बदलाव का असर पोल्ट्री फीड की लागत पर दिखने लगा है. क्योंकि पोल्ट्री सेक्टर दूसरे एग्रीकल्चर सेक्टर की तरह डिमांड और सप्लाई की स्थिति, बाजार इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी नीतियों की भूमिका के अधीन है. रिकी थापर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एक फरवरी, 2026 को पेश होने वाले बजट 2026-27 में पोल्ट्री सेक्टर के लिए सहयोग की उम्मीद की है. उनकी डिमांड है कि पूरे साल उचित कीमतों पर पोल्ट्री के लिए फीड उपलब्ध हो. सरकार फीड सप्लाई और पोल्ट्री प्रोडक्ट की बढ़ती डिमांड को ध्यान में रखते हुए लम्बे वक्त की रणनीति बनाए.
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