फसल बर्बाद, चारा-पानी खत्म... मराठवाड़ा में मवेशी बेचने बाजार पहुंच रहे किसान

फसल बर्बाद, चारा-पानी खत्म... मराठवाड़ा में मवेशी बेचने बाजार पहुंच रहे किसान

मराठवाड़ा में गंभीर सूखे से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. फसलें बर्बाद होने और चारा-पानी के संकट के कारण छत्रपति संभाजीनगर के वडोद बाजार में किसान मजबूरी में अपने मवेशी बेचने पहुंच रहे हैं.

Marathwada DroughtMarathwada Drought
क‍िसान तक
  • छत्रपति संभाजीनगर,
  • Oct 07, 2026,
  • Updated Oct 07, 2026, 5:04 PM IST

मराठवाड़ा के कई हिस्सों में पिछले कई महीनों से बारिश नहीं होने के कारण सूखे की स्थिति गंभीर हो गई है. खेतों में पानी नहीं है, तालाब सूख चुके हैं और किसानों के सामने मवेशियों के लिए चारे और पानी का संकट खड़ा हो गया है. राज्य सरकार ने कई जिलों को अकाल प्रभावित घोषित कर फसल नुकसान का पंचनामा और किसानों को जल्द मुआवजा देने का आश्वासन दिया है. साथ ही, मवेशियों के लिए चारा छावनियां शुरू करने की बात भी कही गई है. किसानों की परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने कई सारी योजनाओं का ऐलान किया है.

हालांकि जमीनी हालात बेहद चिंताजनक हैं. छत्रपति संभाजीनगर जिले के वडोद बाजार में बड़ी संख्या में किसान अपने मवेशी बेचने पहुंचे. यह बाजार मवेशियों की खरीद-बिक्री के लिए बहुत मशहूर है. यहां दूर-दराज के इलाकों से किसान अपने मवेशी बेचने आते हैं. इस बार हालात अलग हैं क्योंकि किसान केवल मवेशी बेचने आ रहे हैं. किसानों के पास पशुओं को खिलाने के लिए चारा नहीं है, इसलिए पशु बेचने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है.

कपास और सोयाबीन की फसल बर्बाद

किसानों का कहना है कि सूखे के कारण सोयाबीन और कपास की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. बैंक और निजी कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है. गांवों में पीने के पानी की समस्या बढ़ रही है और चारे-पानी के अभाव में मवेशी बीमार पड़ रहे हैं. पशु बेचने आए किसानों की शिकायत है कि सरकारी योजनाएं धरातल पर नहीं उतर रही हैं. पशुपालन की योजनाओं का उन्हें लाभ नहीं मिल रहा है. किसानों ने सरकार से आग्रह किया है कि जल्द राहत के कदम उठाए जाएं ताकि हालात सुधर सके.

किसानों का कहना है कि उन्हें सरकार से उम्मीद थी कि इस कठिन समय में उनकी कर्जमाफी होगी और मवेशियों के लिए चारा छावनी बनाई जाएगी. उनका आरोप है कि अभी तक पूरी कर्जमाफी भी नहीं हुई और मवेशियों के लिए कोई चारा छावनी भी शुरू नहीं की गई.

मवेशी बेचकर रोजमर्रा का खर्च निकाल रहे किसान

वडोद बाजार में मवेशी बेचने पहुंचे किसान रामदास चिट्टे के पास तीन एकड़ जमीन है. उन्होंने अपने खेत में सोयाबीन और कपास की फसल लगाई थी, लेकिन बारिश नहीं होने से पूरी फसल बर्बाद हो गई. रामदास चिट्टे पर करीब डेढ़ लाख रुपये का फसल कर्ज है. उनका कहना है कि सरकार ने चारा और पानी की व्यवस्था का ऐलान तो किया है, लेकिन यह मदद किसानों तक कब पहुंचेगी, इसकी कोई जानकारी नहीं है.

किसान का कहना है कि मवेशियों और इंसानों की जान जाने के बाद मदद पहुंचाने का क्या फायदा? मजबूरी में वह अपने मवेशी बेचकर रोजमर्रा के खर्च और चारे-पानी का इंतजाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

पशुओं के लिए खब खुलेगी चारा छावनी?

वहीं, वैजापुर से वडोद बाजार पहुंचे अमोल पवार किसान ने बताया कि गांव में सूखे जैसे हालात हैं. मवेशियों को खिलाने के लिए चारा नहीं बचा है. खेतों में भी चारा खत्म हो चुका है. किसान का आरोप है कि सरकार केवल घोषणाएं करती है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है. इसी मजबूरी के चलते वह अपने मवेशी बेचने बाजार पहुंचे हैं.

सिल्लोड के कृषि अधिकारी जनार्दन जगताप ने बताया कि फिलहाल उपलब्ध चारा कुछ दिनों तक ही चल पाएगा. इसके बाद मवेशियों के लिए चारे की गंभीर समस्या हो सकती है. प्रशासन की ओर से जल्द रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी. जिन इलाकों में मवेशियों की संख्या अधिक है, वहां चारा छावनी शुरू करने का प्रस्ताव भी सरकार के पास भेजा जाएगा.(इसरारुद्दीन चिश्ती की रिपोर्ट)

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