बाढ़ में डूबी फसल, बढ़ी किसानों की चिंतामहाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में वर्धा नदी में आई बाढ़ ने किसानों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है. लगातार हुई बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ गया और कई गांवों के खेत पानी में डूब गए. सबसे ज्यादा नुकसान बल्लारपुर तहसील के विसापुर क्षेत्र के किसानों को हुआ है. खेतों में कई दिनों तक पानी भरा रहने से धान, सोयाबीन, कपास और तुअर की फसल पूरी तरह खराब हो गई. जिन किसानों ने अच्छी पैदावार की उम्मीद में कर्ज लेकर बुआई की थी, वे अब अपनी बर्बाद हुई फसलों को देखकर परेशान हैं.
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर खरीफ की फसलों पर पड़ा है. धान, सोयाबीन, कपास और तुअर की फसल पानी में डूबने से नष्ट हो गई है. कई किसानों के तीन से चार एकड़ तक के खेत पूरी तरह खराब हो गए हैं. किसानों का कहना है कि इस साल अच्छी बारिश की उम्मीद में उन्होंने समय पर बुआई की थी, लेकिन बाढ़ ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया. अब उन्हें दोबारा बुआई करनी पड़ेगी, लेकिन इसके लिए उनके पास पैसे नहीं बचे हैं.
स्थानीय किसानों ने बताया कि उन्होंने बुआई के लिए 50 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का कर्ज लिया था. खेती में बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी पर पहले ही बड़ी रकम खर्च हो चुकी है. अब जब पूरी फसल बर्बाद हो गई है तो किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोबारा बुआई के लिए पैसा कहां से आएगा. उनका कहना है कि यदि जल्द मदद नहीं मिली तो इस सीजन की खेती पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी.
किसानों का कहना है कि उन्होंने हर साल समय पर अपना कृषि ऋण चुकाया है. इसके बावजूद उन्हें किसी भी तरह की कर्ज माफी का लाभ नहीं मिलता. उनका आरोप है कि जिन किसानों का कर्ज बकाया है, उन्हें सरकार की योजनाओं का फायदा मिल जाता है, लेकिन जो किसान ईमानदारी से कर्ज चुकाते हैं, उन्हें कोई राहत नहीं मिलती. किसान सवाल पूछ रहे हैं कि क्या समय पर कर्ज चुकाना उनकी गलती है? उनका कहना है कि सरकार को ऐसे किसानों के लिए भी अलग राहत योजना बनानी चाहिए.
किसानों का कहना है कि फसल नुकसान होने पर मिलने वाला मुआवजा उनकी वास्तविक लागत के मुकाबले बहुत कम है. उनके अनुसार, एक हेक्टेयर में खेती करने पर लगभग 50 हजार रुपये तक का खर्च आता है, जबकि नुकसान होने पर करीब 6 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा मिलता है. ऐसे में इस राशि से किसानों की भरपाई नहीं हो सकती. किसानों ने सरकार से मांग की है कि फसल नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए और कर्ज माफी की भी घोषणा की जाए, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें.
विसापुर क्षेत्र के कृषि अधिकारी उद्धव डिकळे ने बताया कि केवल विसापुर क्षेत्र में करीब 300 हेक्टेयर फसल बाढ़ से प्रभावित हुई है. वहीं बल्लारपुर तहसील में लगभग 1400 हेक्टेयर क्षेत्र की फसल खराब होने का अनुमान है. प्रशासन ने नुकसान का आकलन करने के लिए पंचनामा शुरू कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद पात्र किसानों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा.
बाढ़ का असर केवल बल्लारपुर तक सीमित नहीं है. चंद्रपुर जिले की राजूरा, गोंडपीपरी, वरोरा और अन्य तहसीलों में भी बड़ी संख्या में किसानों की फसल बर्बाद हुई है. खेतों में पानी भरने से खेती का काम पूरी तरह रुक गया है. किसानों को अब सरकार से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है, ताकि वे दोबारा खेती कर सकें और आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें.
बाढ़ से प्रभावित किसानों का कहना है कि केवल औपचारिक मुआवजा पर्याप्त नहीं होगा. उनका मानना है कि सरकार को फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कर उचित आर्थिक सहायता देनी चाहिए. साथ ही जिन किसानों ने खेती के लिए कर्ज लिया है, उनके कृषि ऋण को माफ या पुनर्गठित किया जाए. किसानों का कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली, तो उनके लिए अगली फसल की तैयारी करना भी मुश्किल हो जाएगा. (विकास राजुरकर की रिपोर्ट)
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