Heatwave Alert: यूपी में भीषण गर्मी और लू का टॉर्चर, खेती किसानी के लिए पढ़ें उपकार का जरूरी सलाह

Heatwave Alert: यूपी में भीषण गर्मी और लू का टॉर्चर, खेती किसानी के लिए पढ़ें उपकार का जरूरी सलाह

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद लखनऊ की बैठक के अनुसार यूपी में अगले दो हफ्ते मौसम का मिजाज काफी गर्म रहेगा, जहां 28 मई तक बुंदेलखंड समेत कई हिस्सों में भीषण लू के साथ पारा 46°C तक जा सकता है और दूसरे वही 29 मई-4 जून तक तराई और पूर्वी यूपी में बारिश से थोड़ी राहत मिलेगी.

Advertisement
Heatwave Alert: यूपी में भीषण गर्मी और लू का टॉर्चर, खेती किसानी के लिए पढ़ें उपकार का जरूरी सलाहभीषण गर्मी और लू का टॉर्चर (AI- Image)

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) की क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप (CWWG) की बैठक में भीषण गर्मी को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने राज्य के किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी की है. 28 मई तक मौसम पूरी तरह सूखा रहेगा और बुंदेलखंड में पारा 46°C तक जा सकता है. हालांकि, 29 मई से पूर्वी यूपी और तराई क्षेत्रों में बारिश की उम्मीद है. इस चिलचिलाती धूप और लू से बचने के लिए किसान दोपहर 12 से 4 बजे के बीच खेतों में काम करने से बचें, साथ में पानी की बोतल जरूर रखें और खेती के सारे जरूरी काम सुबह या शाम के वक्त ही निपटाएं. खाली खेतों की मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें ताकि धूप से कीड़े और खरपतवार के बीज नष्ट हो जाएं.

मिट्टी की ताकत बढ़ाने और जड़-तना सड़न या झुलसा जैसी बीमारियों से बचाव के लिए 2.5 किलो ट्राइकोडर्मा विरिडी या ट्राइकोडर्मा हरजियेनम को 65-75 किलो सड़ी गोबर की खाद में मिलाएं. इस मिश्रण पर हल्के पानी का छींटा मारकर 8-10 दिन छांव में रखें और आखिरी जुताई के समय खेत में मिला दें. इससे धान में लगने वाले शीथ ब्लाइट जैसे रोगों का खतरा कम हो जाता है. ध्यान रहे, जिन खेतों में गोबर या हरी खाद का इस्तेमाल किया गया है, वहां यूरिया  की मात्रा 25% तक कम कर दें ताकि संतुलित पोषण मिले.

धान की सही नर्सरी और हरी खाद का स्मार्ट प्रबंधन

खरीफ सीजन के लिए धान की नर्सरी और खेतों की तैयारी का यह सबसे सही समय है. मौसम के मिजाज को देखते हुए सामान्य धान की नर्सरी को अभी रोककर एक सप्ताह बाद ही डालें. लंबी अवधि की किस्मों की नर्सरी पहले और कम समय वाली किस्मों की बाद में डालें. इस समय सांडा धान की नर्सरी डालने का बिल्कुल सही वक्त है. नर्सरी के लिए महीन दाने की प्रजातियां 30 किलो, मोटे दाने वाली 40 किलो और हाइब्रिड धान 12-15 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें. ऊसर भूमि के लिए सीएसआर-30, 36 या नरेंद्र ऊसर धान और बाढ़ वाले क्षेत्रों के लिए आई.आर. 64-सब 1 या जलनिधि किस्में चुनें. धान रोपाई से पहले खेत में हरी खाद के लिए 80-90 किलो सनई या 60 किलो ढैंचा प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई जरूर कर दें. 

गन्ना, मक्का और उर्द -मूंग के लिए खास सलाह

जायद मूंग और उर्द में नमी बनाए रखने के लिए सिर्फ शाम के वक्त हल्की सिंचाई करें. यदि फसलों में पीला मोजैक रोग दिखाई दे, तो ग्रसित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट कर दें और सफेद मक्खी को रोकने के लिए प्रति एकड़ 5 यलो स्टिकी ट्रैप लगाएं या इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें. मक्का की फसल में नमी रखें; तना छेदक के लिए इमामैक्टिन बेंजोएट और फाल आर्मी वर्म के लिए 4-5 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ का उपयोग करें. गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए समय पर गुड़ाई-सिंचाई करें और बसंतकालीन गन्ने में सिंचाई के बाद 50 किलो यूरिया प्रति एकड़ से टॉपड्रेसिंग करें. गन्ने में चोटीबेधक कीट दिखने पर प्रभावित पौधों को जमीन की सतह से काटकर हटा दें और ज्यादा प्रकोप होने पर क्लोरेन्ट्रोनिलीप्रोल से ड्रेचिंग करें. 

आम के बागों और हरी सब्जियों के जरूरी छिड़काव

इस मौसम में सब्जियों और आम के बागों में पर्याप्त नमी रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. लौकी, तोरई और कद्दू को फल मक्खी से बचाने के लिए प्रति हेक्टेयर 8-10 क्यू ल्योर फेरोमोन ट्रैप लगाएं. मिर्च में मरोड़िया और मोजैक वायरस फैलाने वाली सफेद मक्खी को रोकने के लिए 20-25 स्टिकी ट्रैप प्रति हेक्टेयर लगाएं. भिंडी में सफेद मक्खी और फल बेधक के नियंत्रण के लिए थियाक्लोप्रिड या फ्लुबेन्डीमाइड का छिड़काव करें. आम के बागों में फलों के अच्छे विकास के लिए हल्की सिंचाई करें और उन पर 0.5% सल्फेट ऑफ पोटाश व जिंक सल्फेट का छिड़काव करें. भुनगा  और थ्रिप्स कीटों से बचाव के लिए पेड़ के तनों के पास नीले-पीले स्टिकी ट्रैप लटकाएं और आम को अंदर से सड़ने से बचाने के लिए 6 से 8 ग्राम बोरेक्स प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें.

POST A COMMENT