धान की फसल को नुकसान की आशंकाअक्टूबर महीने के जाते-जाते एक बार फिर बिहार के मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा. यह बदलाव ऐसे समय में होने जा रहा है, जब धान की फसल पकने की अंतिम अवस्था में है. दरअसल, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और पूर्वी हवाओं के सक्रिय होने के कारण बिहार के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग की ओर से राज्य में 27 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान लगाया गया है, जबकि 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है.
मौसम में होने वाले बदलाव को लेकर एक बार फिर बिहार के किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं. एक ओर जहां धान की फसल धीरे-धीरे पकनी शुरू हो चुकी है. वहीं, किसान सब्जियों की खेती भी शुरू कर चुके हैं. इस स्थिति में अगर तेज हवाओं के साथ बारिश होती है, तो इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर देखने को मिलेगा. साथ ही, सब्जियों की फसल पर भी इसका असर पड़ सकता है. अगर इस बारिश के दौरान फसलों को क्षति होती है, तो बिहार में अगस्त से लेकर अक्टूबर तक हर महीने किसानों की फसलों को कभी बाढ़, तो कभी बारिश से नुकसान हो रहा है.
पटना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस अवधि में राज्य के कुछ स्थानों पर मेघगर्जन (आकाशीय बिजली चमकने), वज्रपात के साथ-साथ 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झोंकेदार सतही हवाएं चलने की संभावना है. वज्रपात के कारण इंसानों, धन और पशुधन की हानि हो सकती है. इसलिए लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है. साथ ही, मौसम विभाग ने किसानों को इस दौरान खेती से जुड़े किसी भी तरह के कार्य करने से बचने की सलाह दी है. आकाशीय बिजली चमकने और मेघगर्जन के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों, जलाशयों और बिजली के खंभों के पास बिल्कुल न जाएं.
मौसम विभाग के अनुसार, 27 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच आंधी और वज्रपात से खेतों में खड़ी फसलों और फलदार वृक्षों को नुकसान पहुंचने की आशंका है. तेज हवा और खराब मौसम के चलते झुग्गी-झोपड़ियों, टिन की छतों और कच्चे मकानों को क्षति पहुंच सकती है. चूंकि वर्तमान में खरीफ फसलों की कटाई का समय है, इसलिए किसान अपनी पकी हुई फसलों की कटाई कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर रख लें. खेतों में कटी हुई या खुले में सुखाने के लिए रखी गई फसलों को बारिश से बचाने के लिए उचित प्रबंध करें और सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करें. यदि अत्यधिक आवश्यक न हो, तो इस अवधि में कटाई का कार्य स्थगित रखें और मौसम सामान्य होने पर ही कटाई करें.
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