अल नीनो से खेती पर असर की आशंका गहराई (AI Image)देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच लोग राहत देने वाली बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब अल नीनो को लेकर सामने आ रहे पूर्वानुमानों ने नई चिंता पैदा कर दी है. मौसम से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आकलनों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, अगर प्रशांत महासागर में बन रही स्थितियां मजबूत होती हैं तो इसका असर भारत के मॉनसून पर भी पड़ सकता है. खासकर गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और राजस्थान जैसे राज्यों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है.
अहमदाबाद स्थित मौसम विशेषज्ञ और आईएमडी के पूर्व वैज्ञानिक अशोक देसाई के अनुसार, अल नीनो ऐसी स्थिति होती है जब प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इसके चलते वैश्विक मौसम प्रणाली प्रभावित होती है और कई क्षेत्रों में बारिश का वितरण बदल सकता है. भारत जैसे मॉनसून आधारित देश में इसका असर बारिश की मात्रा और समय दोनों पर देखने को मिल सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जून और जुलाई के दौरान बारिश सामान्य से कम रहती है तो इसका सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ेगा. खरीफ फसलों की बुवाई, मिट्टी में नमी और सिंचाई की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. बारिश में कमी होने पर किसानों की उत्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति भी बन सकती है.
मौसम विश्लेषणों के आधार पर माना जा रहा है कि पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में मानसून की रफ्तार अपेक्षा से धीमी रह सकती है. सामान्य तौर पर जिन इलाकों में जून के मध्य तक अच्छी बारिश शुरू हो जाती है, वहां इस बार बारिश में देरी या कमजोर दौर की संभावना पर नजर रखी जा रही है. हालांकि अंतिम स्थिति आगे आने वाले आधिकारिक पूर्वानुमानों और वास्तविक मौसम गतिविधियों पर निर्भर करेगी.
कम वर्षा का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता. जलाशयों में पानी का स्तर घट सकता है, सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और खाद्य उत्पादन पर दबाव बढ़ने से कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून लंबे समय तक कमजोर रहता है तो कई क्षेत्रों में पेयजल और कृषि दोनों के लिए चुनौती पैदा हो सकती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, अभी मॉनसून सीजन जारी है और आने वाले हफ्तों में मौसम की स्थितियां लगातार बदल सकती हैं. ऐसे में किसानों और आम लोगों के लिए आधिकारिक मौसम पूर्वानुमानों पर नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा. अगर समय पर अच्छी बारिश के दौर सक्रिय होते हैं तो संभावित कमी की कुछ भरपाई भी हो सकती है, लेकिन फिलहाल अल नीनो को लेकर सतर्कता बढ़ गई है. (अतुल तिवारी की रिपोर्ट)
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