दिल्ली में सर्दी की मारभारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा अपडेट्स में कहा है कि अगले सात दिनों तक दिल्ली में मौसम सूखा रहेगा, आसमान ज्यादातर साफ रहेगा या हल्के बादल छाए रहेंगे और बारिश का कोई अनुमान नहीं है. सूखे मौसम का मतलब है कि दिल्ली में अभी ठंड से राहत की कोई उम्मीद नहीं है. दिल्ली में इस बार देर से सर्दी शुरू हुई है, लेकिन अभी उसका खतरनाक असर देखा जा रहा है. सुबह-शाम और रात के समय तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है.
IMD के मुताबिक, रात और सुबह के समय ठंड बनी रहेगी, और कुछ दिनों तक कोहरे या धुंध के कारण विजिबिलिटी कम हो सकती है. सुबह के समय हल्का से मध्यम कोहरा छाए रहने की संभावना है, खासकर हफ्ते के बीच में, जो दिन में तापमान बढ़ने के साथ साफ हो जाएगा.
दिन का तापमान 20°C से 25°C के बीच रहेगा, 16 जनवरी के बाद धीरे-धीरे तापमान बढ़ेगा, जबकि हफ्ते के पहले आधे हिस्से में न्यूनतम तापमान काफी कम रहेगा. सबसे ठंडी रात 15 जनवरी को होने की उम्मीद है, जब न्यूनतम तापमान 3-4°C तक गिर सकता है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी के कुछ इलाकों में शीतलहर चल सकती है. 18 जनवरी से रात का तापमान धीरे-धीरे बढ़कर 8-10°C के आसपास होने की संभावना है.
IMD ने चेतावनी दी है कि 15 जनवरी को शीतलहर की स्थिति से परेशानी हो सकती है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और रात या सुबह जल्दी ठंड में रहने वाले लोगों को. पूरे हफ्ते हल्की हवाएं चलने की उम्मीद है, जिससे ठंडी हवा बनी रहेगी और कोहरा बनने में मदद मिलेगी. लोगों को सलाह दी जाती है कि वे पर्याप्त सावधानी बरतें, कई लेयर वाले कपड़े पहनें और सबसे ज्यादा ठंड के घंटों में बाहर कम निकलें.
सोमवार को, कई वेदर स्टेशनों पर न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया, और IMD ने कुछ जगहों पर भीषण शीतलहर की स्थिति बताई. IMD के अनुसार, शीतलहर की स्थिति तब घोषित की जाती है जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री नीचे चला जाता है.
एयर क्वालिटी एंड वेदर सर्विसेज (AQWS) के अनुसार, दिल्ली की हवा की क्वालिटी 14 जनवरी से 16 जनवरी तक 'बहुत खराब' श्रेणी में रहने की संभावना है. अगले छह दिनों के पूर्वानुमान से भी पता चलता है कि हवा की क्वालिटी 'बहुत खराब' श्रेणी में बनी रहेगी.
डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) से पता चलता है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण ट्रांसपोर्ट है, जिसका योगदान 14.3 प्रतिशत है, इसके बाद दिल्ली और आसपास के उद्योगों का 12.1 प्रतिशत योगदान है. कचरा जलाने से 1.2 प्रतिशत, कंस्ट्रक्शन से 1.8 प्रतिशत, जबकि घरों से निकलने कुल प्रदूषण में 3.5 प्रतिशत का योगदान होता है.
नेशनल कैपिटल रीजन के जिलों में, प्रदूषण में झज्जर का रोल सबसे ज्यादा 20.5 प्रतिशत है, इसके बाद सोनीपत का 7.83 प्रतिशत और रोहतक का 4.9 प्रतिशत है. बहादुरगढ़ का योगदान 2.9 प्रतिशत, गाजियाबाद का 2.1 प्रतिशत और गुड़गांव का 1.2 प्रतिशत है.(अनमोल बाली की रिपोर्ट)
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