आज का मौसमउत्तर भारत में ठंड का स्वरूप अब धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है. मौसम विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह तक उत्तर-पश्चिम भारत में शीतलहर चलने की संभावना नहीं है. हालांकि, घने कोहरे का असर अभी बना रहेगा और पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम सक्रिय रहेगा. IMD ने अपने ताजा बुलेटिन में बताया कि मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ 18 तारीख तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करता रहेगा. इसके साथ ही अगले 4-5 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में घना कोहरा छाए रहने की बहुत ज़्यादा संभावना है.
मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और 17-18 जनवरी को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर ठंडे दिन की स्थिति बन सकती है. पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 17 और 18 जनवरी को कुछ इलाकों में शीतलहर चलने की संभावना जताई गई है.
IMD ने अपने पूर्वानुमान में बताया कि वर्तमान पश्चिमी विक्षोभ 18 जनवरी तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करता रहेगा. इसके बाद 19 और 21 जनवरी की रात से दो नए पश्चिमी विक्षोभ एक के बाद एक उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है. इसके असर से 17 से 22 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. 23 जनवरी को इन इलाकों में व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी के साथ कुछ स्थानों पर भारी गिरावट की संभावना जताई गई है.
उत्तराखंड में 17 और 18 जनवरी को हल्की बारिश और बर्फबारी तथा 21 से 23 जनवरी के बीच अधिक इलाकों में वर्षा-बर्फबारी हो सकती है. 22 और 23 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की बारिश के आसार हैं. 23 जनवरी को पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान में भी बारिश हो सकती है.
इसके अलावा, मौसम विभाग के अनुसार तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे और आसपास के आंध्र प्रदेश व कर्नाटक के इलाकों में अगले 48 घंटों के दौरान पूर्वोत्तर मानसून की बारिश समाप्त होने के अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं.
राहत की बात ये है कि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अगले दो दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है. इसके बाद कुछ दिन तापमान स्थिर रहेगा और फिर 3 से 5 डिग्री तक और बढ़ने की संभावना है. पूर्वी भारत में भी अगले कुछ दिनों में तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है. देश के अन्य हिस्सों में फिलहाल न्यूनतम तापमान में बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं.
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