सरकारी सहयोग से बदली इस गांव की तस्वीर, 150 एकड़ बंजर भूमि पर लहलहाई फसल

सरकारी सहयोग से बदली इस गांव की तस्वीर, 150 एकड़ बंजर भूमि पर लहलहाई फसल

कभी पहाड़ी, पथरीली और जंगली जमीन के रूप में पड़ी यह भूमि आज हरियाली से लहलहा उठी है और किसानों की खुशहाली की कहानी बयां कर रही है. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत मिले सहयोग और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से 150 एकड़ बंजर भूमि खेती योग्य हो गई है.

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सरकारी सहयोग से बदली इस गांव की तस्वीर, 150 एकड़ बंजर भूमि पर लहलहाई फसलबंजर भूमि पर लहलहाई फसल

कहते हैं मेहनत और ईमानदारी से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है. इस कहावत को सच कर दिखाया है बिहार के रोहतास जिले के जमुहार पंचायत अंतर्गत महादेवा गांव के किसानों ने. दरअसल, कभी पहाड़ी, पथरीली और जंगली जमीन के रूप में पड़ी यह भूमि आज हरियाली से लहलहा उठी है और किसानों की खुशहाली की कहानी बयां कर रही है. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत मिले सहयोग और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से महादेवा गांव के 100 से अधिक किसानों ने करीब 150 एकड़ बंजर भूमि को खेती योग्य बना दिया. आज इस जमीन पर तरबूज, खरबूज, सब्जी और स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसलों की खेती कर किसान प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं.

बंजर जमीन पर तरबूज और खरबूज की खेती

महादेवा गांव अब न सिर्फ रोहतास जिला बल्कि पूरे बिहार और अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन चुका है. योजना के तहत किसानों को ड्रिप (टपक) और स्प्रिंकलर (फुहार) सिंचाई तकनीक से जोड़ा गया. आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से जूझ रहे किसानों ने दशकों से बेकार पड़ी जमीन पर आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाकर तरबूज और खरबूज की खेती शुरू की. देखते ही देखते यह पहल एक आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसका असर आसपास के गांवों में भी दिखाई दे रहा है.

किसानों को लाखों की हो रही कमाई

सरकार की ओर से बोरवेल और सबमर्सिबल पंप की सुविधा मिलने के बाद गांव के 15 किसानों ने क्लस्टर मॉडल के तहत स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की. करीब 25 एकड़ भूमि में की जा रही इस खेती से किसानों को लाखों की आय हो रही है. इसके साथ ही धान, गेहूं और सब्जियों की खेती में भी जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा रहा है. लगभग 25 एकड़ भूमि में आधुनिक तरीके से की जा रही सब्जी उत्पादन सिस्टम अब दूसरे जिलों के किसानों के लिए भी उदाहरण बन चुकी है.

जल-जीवन-हरियाली योजना से बदली जिंदगी

किसान आलोक कुमार ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत ड्रिप इरिगेशन उनके लिए वरदान साबित हुई. करीब सात एकड़ भूमि में पिछले छह वर्षों से तरबूज और खरबूजे की खेती कर रहे हैं. पारंपरिक खेती की तुलना में चार गुना अधिक मुनाफा हो रहा है. इसी आमदनी से बेटे को कोटा में मेडिकल की तैयारी और बेटी को दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ा पा रहे हैं.  

महादेवा गांव बन रहा प्रेरणा का स्त्रोत

एक दूसरे किसान अनीश कुमार सिंह ने बताया कि ड्रिप इरिगेशन की सुविधा मिलने के बाद दो एकड़ भूमि में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है. पिछले तीन साल में इस अत्याधुनिक खेती से अच्छी आमदनी हुई है. इसी खेती की बदौलत कच्चे घर से पक्के घर का सपना पूरा हुआ. आज यह खेती दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. महादेवा गांव की यह कहानी साबित करती है कि सही नीति, सरकारी सहयोग और किसानों की मेहनत मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है. (रोहित सिंह की रिपोर्ट)

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