
निशा यादव की आटा चक्की से हो रही अच्छी कमाईउत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं के जीवन में बड़े बदलाव आ रहे हैं. प्रदेश के बाराबंकी में तीन महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह से कर्ज लेकर रोजगार शुरू किया और आज वे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है. जिले के दाउदपुर की निशा यादव ने मसाला और आटा पीसने की चक्की लगाई तो वहीं, मोनी विश्वकर्मा ने फसल कटाई की मशीन खरीदी, जिसे वह किराए पर देकर पैसे कमा रही हैं. जबकि, नूरपुर की सकीना बानो ने दो ई-रिक्शा और एक कार से लेकर आय का जरिया खड़ा किया. पढ़िए तीनों की सफलता की कहानी…
बाराबंकी के बंकी ब्लॉक की ग्राम पंचायत दाउदपुर निवासी निशा यादव ने शिव स्वयं महिला सहायता समूह से 50 हजार रुपये का कर्ज लेकर मसाला और आटा पीसने की चक्की लगाई. अब गांव और आसपास के लोग उनके यहां मिर्च, हल्दी, धनिया और आटा पिसवाने आते हैं. निशा खुद मशीन चलाती हैं और इस काम से हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक बचा लेती हैं. इससे घर के खर्च के साथ बच्चों की फीस जमा करने में भी मदद मिल रही है.

निशा यादव ने बताया, "हमने समूह से 50 हजार रुपये लोन लेकर चक्की लगाई है. इसमें गांव के लोग आकर मसाला या आटा पिसवाते हैं. अब हमें महीने के 15 से 20 हजार रुपये बच जाते हैं. लोन भी 15 महीने का था, जो थोड़ा सा बाकी है. इस चक्की को लगाने की वजह से हमारे बच्चों की फीस समय पर जमा हो जाती है. हम सरकार का धन्यवाद देते हैं."
दाउदपुर गांव की मोनी विश्वकर्मा के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ठीक नहीं थी. उनके पति मजदूरी और वेल्डिंग का काम करते थे, लेकिन परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल था. मोनी ने मां लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह बनाया और समूह से डेढ़ लाख रुपये का कर्ज लेकर फसल काटने वाली मशीन खरीदी. अब उनके पति खेतों में मशीन से फसल काटते हैं. मोनी के मुताबिक, हर फसल की कटाई से 30 से 35 हजार रुपये की कमाई होती है. वह समूह की दूसरी महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करती हैं.
मोनी विश्वकर्मा ने कहा, "इस स्वयं सहायता समूह की वजह से हमें समाज में एक नई पहचान मिली है. हमने समूह बनाया, फिर फसल काटने वाली मशीन करीब डेढ़ लाख रुपये में ली. इतना ही समूह से लोन लिया. इससे हमें हर फसल की कटाई में 30 से 35 हजार की कमाई हो जाती है. पहले हमारे घर के हालात अच्छे नहीं थे, हमारी माली हालत भी अच्छी नहीं थी. अब पहले से सब ठीक है." दूसरी महिलाओं को संदेश देते हुए मोनी ने कहा, "गांव की महिलाओं से कहना है कि अपना रोजगार खुद करिए. एक दिन में स्थिति नहीं बदलती है, लेकिन एक दिन हालात जरूर बदलेंगे."
वहीं, बंकी ब्लॉक की ग्राम पंचायत नूरपुर निवासी सकीना बानो को उस समय मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जब उनके पति ने उन्हें तीन बेटियों के साथ छोड़ दिया. भाइयों के घर रहने के दौरान उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया. ख्वाजा स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद वर्ष 2021 में कर्ज लेकर पहला ई-रिक्शा खरीदा. कमाई से कर्ज चुकाने के बाद दूसरा ई-रिक्शा लिया.
इसके बाद सकीना ने समूह से चार लाख रुपये का कर्ज लिया. भाइयों की मदद और अपनी पूंजी मिलाकर कार खरीदी और उसे ओला में लगा दिया. अब उनके पास दो ई-रिक्शा और एक कार है. इन तीनों वाहनों से वह हर महीने 25 से 30 हजार रुपये कमाती हैं. इसी आमदनी से परिवार का खर्च, बेटियों की पढ़ाई और परवरिश कर रही हैं.
सकीना बानो ने बताया, "हमारे पति ने हमको छोड़ दिया. हम अपनी तीन बेटियों के साथ भाइयों के घर में रहे. फिर समूह के बारे में पता चला, तो हमने 2021 में समूह से लोन लेकर ई-रिक्शा लिया. फिर कुछ फायदा हुआ, तो हमने पहला कर्ज उतारकर दूसरा लोन लिया और दूसरा ई-रिक्शा निकलवाया."
उन्होंने आगे कहा, "समूह से फिर चार लाख रुपये का लोन लिया. कुछ मदद भाइयों ने की और बाकी अपना पैसा लगाकर कार खरीदी, जिसे ओला में लगा दिया. अब हम तीनों गाड़ियों से महीने का 25 से 30 हजार रुपये कमा रहे हैं. हम प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हैं, जिनकी वजह से आज हम खुद रोजगार करके अपना खर्च और बच्चों की फीस जमा कर पा रहे हैं."
उपायुक्त (स्वतः रोजगार), बाराबंकी सुनील कुमार कौशल ने बताया कि सीएम और पीएम की योजना के तहत हर साल हजारों दीदियों को लखपति बनाया जा रहा है. इनको गांव में समूह बनाकर रजिस्टर्ड करवाया जा रहा है. सकीना दीदी ने पहले दो ई-रिक्शा निकलवाए, फिर कार लेकर ओला में लगवा दिया है, जिससे वह अपना और परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि दाउदपुर की निशा यादव ने चक्की लगाई है, जबकि दूसरी महिला ने समूह से कर्ज लेकर फसल काटने की मशीन खरीदी है. इन कारोबारों से महिलाओं को आमदनी का साधन मिला है और वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाने में योगदान दे रही हैं.
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