पिछले कुछ वर्षों में डीजीएफटी ने अपनी प्रक्रियाओं को लगभग पूरी तरह से स्वचालित कर दिया है.निर्यातकों को कारोबार में आसानी देने के उद्देश्य से वाणिज्य मंत्रालय 15 नवंबर को अपग्रेडेड ईबीआरसी यानी इलेक्ट्रॉनिक बैंक रियलाइजेशन सर्टिफिकेट सुविधा शुरू करने जा रहा है. ईबीआरसी निर्यातकों को लेनदेन के समय और लागत को कम करने में मदद करेगा. जबकि, शिपिंग बिल, सॉफ्टेक्स, चालान के समाधान को सरल बनाकर बैंकरों पर बोझ को भी कम कर देगा. इससे व्यापार करने में तेजी आएगी.
वाणिज्य मंत्रालय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों के लिए ईबीआईरसी सिस्टम का पायलट लॉन्च करने जा रहा है. इलेक्ट्रॉनिक बैंक रियलाइजेशन सर्टिफिकेट (eBRC) निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है और इसे बैंक की ओर से इस बात की पुष्टि के रूप में जारी किया जाता है कि निर्यातक को माल या सेवाओं के निर्यात के लिए विदेशी खरीदार से भुगतान प्राप्त हुआ है.यह प्रमाणपत्र देश में निर्यात आय के आदान-प्रदान को मान्य करता है और विदेशी मुद्रा नियमों के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करता है. बता दें कि बैंक विदेश से किए जाने वाले व्यापार पर वस्तुओं के मूल्य पर निगरानी करते हैं. इसलिए निर्यातकों को बैंक रियलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा करना होता है, जिसमें वस्तु और उसके मूल्य समेत कई तरह का ब्यौरा दर्ज होता है.
निर्यातक ईबीआरसी सर्टिफिकेट को वस्तुओं, सेवाओं और डीम्ड निर्यात के आउटबाउंड शिपमेंट के लिए जेनरेट कर सकते हैं. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के बिजनेस सर्कुलर के अनुसार मॉडर्न ईबीआरसी सिस्टम बैंकों की ओर से सीधे डीजीएफटी को भेजे जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक रेमिटेंस मैसेज पर आधारित है. मिले मैसेज के आधार पर निर्यातक अपने ईबीआरसी को खुद से प्रमाणित कर पाएंगे.
मॉडर्न ईबीआरसी सिस्टम निर्यातकों को लेनदेन के समय और लागत को कम करने में सक्षम बनाएगी. यह शिपिंग बिल, सॉफ्टेक्स, चालान आदि समाधान को सरल बनाकर बैंकरों पर बोझ को भी कम करेगा. इससे सामान्य रूप से व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा मिलेगा. बता दें कि सॉफ्टवेयर ट्रेडर्स को निर्यात के बाद SOFTEX फॉर्म भरना होता है.
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इससे निर्यातकों और बैंकों को अपने संसाधनों को अनुकूलित करने और लागत में कटौती करने में मदद मिलेगी. पिछले कुछ वर्षों में डीजीएफटी ने अपनी प्रक्रियाओं को लगभग पूरी तरह से स्वचालित कर दिया है और अब इस नए कदम के साथ निर्यातक पूरी तरह से निर्यात बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और 2030 तक निर्यात 2 ट्रिलियन अमरीकी डालर के हमारे टारगेट को पा सकते हैं.
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