PMKSY: किसानों की सिंचाई के लिए केंद्र दे रहा मदद, निजी निवेश का नहीं है प्रावधान

PMKSY: किसानों की सिंचाई के लिए केंद्र दे रहा मदद, निजी निवेश का नहीं है प्रावधान

PMKSY योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों को सिंचाई परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहायता दे रही है. लोकसभा में सरकार ने बताया कि योजना का उद्देश्य हर खेत तक पानी पहुंचाना, सिंचाई क्षमता बढ़ाना और जल प्रबंधन को बेहतर बनाना है. हालांकि, इस योजना में निजी क्षेत्र के निवेश के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है.

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PMKSY: किसानों की सिंचाई के लिए केंद्र दे रहा मदद, निजी निवेश का नहीं है प्रावधानहर खेत तक पानी पहुंचाने की तैयारी तेज

देश में किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और हर खेत तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) चला रही है. यह योजना राज्यों को वित्तीय सहायता देकर सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद करती है. हालांकि, इस योजना में निजी कंपनियों के निवेश के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई है. यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी.

तीन हिस्सों में चल रही है प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एक अम्ब्रेला (समग्र) योजना है, जिसके तहत तीन अलग-अलग घटकों पर काम किया जाता है. पहला है त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), दूसरा हर खेत को पानी (HKKP) और तीसरा वाटरशेड विकास घटक (WDC). इनमें AIBP और हर खेत को पानी कार्यक्रम का संचालन जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग करता है, जबकि वाटरशेड विकास घटक का संचालन ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा किया जाता है.

राज्यों को मिलती है केंद्रीय सहायता

सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत राज्यों को केंद्रीय सहायता दी जाती है ताकि नई सिंचाई क्षमता विकसित की जा सके, खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हो और खेत स्तर पर सिंचाई से जुड़े विकास कार्य किए जा सकें. इन परियोजनाओं का उद्देश्य किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और खेती में पानी के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना है.

टेंडर के जरिए होता है काम, निजी कंपनियां ले सकती हैं हिस्सा

सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत होने वाले निर्माण कार्यों को राज्य सरकारें प्रतिस्पर्धी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के माध्यम से करवाती हैं. इस प्रक्रिया में निजी ठेकेदार और कंपनियां राज्य सरकारों के खरीद नियमों के अनुसार भाग ले सकती हैं. हालांकि, योजना में निजी क्षेत्र से निवेश को बढ़ावा देने या उसके लिए अलग से किसी प्रावधान की व्यवस्था नहीं की गई है. यानी निजी कंपनियां केवल टेंडर के जरिए काम कर सकती हैं, लेकिन योजना में उनके निवेश के लिए कोई विशेष नीति नहीं है.

पानी के बेहतर उपयोग के लिए किसानों को दिया जाता है प्रशिक्षण

केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि योजना के विभिन्न घटकों के तहत राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश किसानों तथा खेत स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को जल प्रबंधन और पानी के कुशल उपयोग का प्रशिक्षण भी देते हैं. इसका उद्देश्य कम पानी में अधिक उत्पादन और सिंचाई के आधुनिक तरीकों को बढ़ावा देना है.

प्रशिक्षण लेने वाले किसानों का रिकॉर्ड केंद्र के पास नहीं

हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि देशभर में अब तक कितने किसानों और फील्ड स्तर के कर्मचारियों को इस योजना के तहत प्रशिक्षण दिया गया है, इसका राज्यवार या समेकित रिकॉर्ड केंद्र सरकार के पास उपलब्ध नहीं है. प्रशिक्षण का काम राज्यों द्वारा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है, लेकिन उसका केंद्रीकृत डेटा नहीं रखा जाता.

लोकसभा में सरकार ने दी जानकारी

यह पूरी जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी. सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, खेतों तक पानी पहुंचाना और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को लगातार सहायता दी जा रही है.

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