PDS वाला चावलदेश के करोड़ों राशन कार्ड धारकों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरित किए जाने वाले चावल की क्वालिटी सुधारने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के तहत अब सरकारी राशन में मिलने वाले चावल में टूटे हुए दानों की मात्रा काफी कम कर दी जाएगी, जिससे लाभार्थियों को पहले से बेहतर क्वालिटी का चावल मिलेगा. वहीं, मिलिंग के दौरान टूटे हुए चावल को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा और इसका उपयोग इथेनॉल बनाने में किया जाएगा.
सरकार के नए निर्णय के तहत कच्चे चावल में टूटे हुए दानों की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है. वहीं, उबले हुए चावल में यह सीमा 16 प्रतिशत से घटाकर केवल 5 प्रतिशत कर दी जाएगी. सरकार के अनुसार, यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) 2027-28 तक सभी खरीद करने वाले राज्यों में नई व्यवस्था लागू हो जाएगी. इसके बावजूद पात्र परिवारों को मिलने वाले राशन की मात्रा में कोई कमी नहीं की जाएगी. खाद्य मंत्रालय का कहना है कि लगभग तीन दशक बाद पहली बार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में वितरित होने वाले चावल की क्वालिटी से जुड़े मानकों में इतना बड़ा बदलाव किया गया है. इसका सीधा लाभ करोड़ों लाभार्थियों को मिलेगा, जिन्हें अब पहले की तुलना में अधिक साफ और बेहतर क्वालिटी वाला चावल मिलेगा.
सरकार ने बताया कि चावल की मिलिंग के दौरान अलग किए गए 100 प्रतिशत टूटे हुए चावल को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा. इसका उपयोग इथेनॉल उत्पादन और अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा. इससे चावल का बेहतर उपयोग होगा और सरकार को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा. हालांकि, सरकार ने इस विषय पर अधिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन माना जा रहा है कि टूटे हुए चावल का उपयोग बायोफ्यूल कार्यक्रमों में भी किया जा सकता है.
खाद्य मंत्रालय के अनुसार, इस नई व्यवस्था से परिवहन, भंडारण और पैकेजिंग पर होने वाला खर्च भी कम होगा. वहीं, अब टूटे हुए चावल की नीलामी सीधे राइस मिलों से की जाएगी, जिससे उसे अलग से गोदामों तक ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके अलावा जूट की बोरियों के बजाय जरुरत के अनुसार एचडीपीई (HDPE) बैग का उपयोग किया जाएगा. सरकार का अनुमान है कि इन बदलावों से हर साल करीब 2,161 करोड़ रुपये की बचत होगी. वहीं, टूटे हुए चावल की बिक्री से होने वाली अतिरिक्त आय खाद्य सब्सिडी का बोझ कम करने में भी मदद करेगी.
नई व्यवस्था के तहत चावल की प्रत्येक बोरी पर QR कोड लगाया जाएगा. इससे चावल की खरीद से लेकर वितरण तक पूरी सप्लाई चेन की डिजिटल ट्रैकिंग संभव होगी. सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, इन्वेंट्री प्रबंधन बेहतर होगा और सार्वजनिक वितरण सिस्टम में होने वाली गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी.
खाद्य मंत्रालय ने बताया कि इस व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है. इन राज्यों में टूटे हुए चावल को अलग कर बेहतर क्वालिटी वाले चावल तैयार करने की प्रक्रिया सफल रही, जिसके बाद इसे पूरे देश में लागू करने का फैसला लिया गया है.
केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस फैसले को भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सभी पात्र परिवारों को पहले की तरह पूरा राशन मिलता रहेगा, लेकिन अब उन्हें बेहतर क्वालिटी वाला चावल उपलब्ध कराया जाएगा. उनके अनुसार यह सुधार गुणवत्ता, पारदर्शिता, संसाधनों के बेहतर उपयोग और लागत में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे सरकार और लाभार्थी दोनों को फायदा होगा.
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