UP News: धान रोपाई के लिए पानी की किल्लत नहीं होगी, सिंचाई के लिए नहरें होने वाली हैं लबालब

UP News: धान रोपाई के लिए पानी की किल्लत नहीं होगी, सिंचाई के लिए नहरें होने वाली हैं लबालब

निजी व किराये के नलकूप की मदद से किसानों ने धान रोपाई भी शुरू कर दी है, लेकिन जो किसान पूरी तरह नहर पर आश्रित हैं वह पानी का इंतजार कर रहे हैं. किसान कभी आसमान की ओर देख रहा है तो कभी नहरों में पानी की उम्मीद में विभाग के पास फोन कर जानकारी ले रहा है.

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UP News: धान रोपाई के लिए पानी की किल्लत नहीं होगी, सिंचाई के लिए नहरें होने वाली हैं लबालब धान रोपाई की रोपाई करने वाले किसानों के बड़ी खुशखबरी (Photo-Kisan Tak)

UP Farmers News: गर्मी व तापमान वृद्धि के बीच किसानों को जहां प्री-मॉनसून ने धोखा दे रहा, तो वहीं सूखी पड़ी उत्तर प्रदेश की नहरें किसानों का दर्द बढ़ा रही हैं. धान की नर्सरी तैयार होने और रोपाई का समय होने से किसानों परेशान हैं. फसलों के साथ-साथ किसान कई सब्जियां भी उगाते है. अब सवाल यह खड़ा होता है कि प्रदेश की नहरों में पानी कब तक छोड़ा जाएगा. मामले में इंडिया टुडे के डिजिटल प्लेटफॉर्म किसान तक ने उप्र सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता अखिलेश सचान से खास बातचीत की. प्रमुख अभियंता अखिलेश सचान ने बताया कि रोस्टर के हिसाब से नहरों में पानी छोड़ा जाता है. जिससे किसानों को सिंचाई करने में कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. इससे पहले मई के महीने में नहरों में पानी छोड़ा गया. जिससे किसानों को पानी की परेशानी नहीं हो.

15 अक्टूबर 2024 तक किसानों को मिलेगी पानी

उन्होंने बताया कि धान की फसलों को किसानों ने बोना शुरू कर दिया है. ऐसे में जुलाई के पहले हफ्ते में नहरों में पानी छोड़ा जाएगा. जो 15 अक्टूबर 2024 तक रोस्टर के हिसाब से पानी का प्रयोग किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सकेंगे. सचान ने बताया कि हमेशा पानी की उपलब्धता नहरों में नहीं होती. कुछ किसान अपने खेतों को सोलर पंप और बोरिंग के द्वारा सिंचाई कर रहे है. जो किसान आर्थिक रूप से कमजोर है, उनके लिए नि: शुल्क पानी सरकार की तरफ खेतों की सिंचाई के लिए दिया जाता है.

किसानों ने शुरू की धान की रोपाई

उत्तर प्रदेश के जिलों में नहरों का जाल बिछा होने से एक बड़ा हिस्सा खेती के लिए नहरों के पानी पर आश्रित है. जिले की प्रमुख फसलों में शामिल धान की रोपाई 15 जून से किसान शुरू कर चुके हैं. इन दिनों धान की नर्सरी तैयार करने खेतों में पानी की आवश्यकता है. वहीं, उड़द की फसल सूख रही है. नहर व माइनर पर निर्भर किसानों को सिंचाई के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालात यह है कि नहरें सूखी हैं, खेत प्यासे हैं और अन्नदाता परेशान हैं.

किसानों को नहरों में पानी का इंतजार

दरअसल, जेठ के महीने में पड़ रही प्रचंड गर्मी से चारों तरफ त्राहिमाम मचा हुआ है. वहीं सूखी नहरें किसानों के साथ साथ जीव जंतुओं के लिए पानी की समस्या भी पैदा कर रहे हैं. किसान रामलाल ने बताया कि नहर तो सूखी पड़ी है पानी यदि नहर में आ जाए तो सिंचाई के लिए पानी मिलेगा. पशु पक्षियों के लिए भी पानी उपलब्ध हो सकेगा, लेकिन फिलहाल नहरों में पानी नहीं आ रहा है. वहीं निजी व किराये के नलकूप की मदद से किसानों ने धान रोपाई भी शुरू कर दी है, लेकिन जो किसान पूरी तरह नहर पर आश्रित हैं वह पानी का इंतजार कर रहे हैं. किसान कभी आसमान की ओर देख रहा है तो कभी नहरों में पानी की उम्मीद में विभाग के पास फोन कर जानकारी ले रहा है. फिलहाल देश में मॉनसून ने दस्तक दे दी है. 

मॉनसून पर आया बड़ा अपडेट

लखनऊ स्थित मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मॉनसून बिहार के भागलपुर से होते हुए रक्सौल तक पहुंच गया है. इसके साथ ही आगामी 2-3 दिनों के दौरान इसके पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो गई हैं. इसी क्रम में जहां पूर्वी उत्तर प्रदेश में 23 जून से बारिश की तीव्रता और क्षेत्रफल में प्रभावी वृद्दि होने उम्मीद है. वहीं, 24 जून से पूर्वोत्तर, तराई और पूर्वांचल के कुछ जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 जून से वर्षा के फैलाव एवं तीव्रता में बढ़ोत्तरी की उम्मीद है. मौसम विभाग ने आंधी-पानी का येलो अलर्ट जारी किया है.

 

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