सिद्धार्थनगर पहुंचा ‘किसान कारवां’भगवान बुद्ध की तपोभूमि सिद्धार्थनगर जनपद में ‘किसान तक’ के किसान कारवां का 48वां पड़ाव पहुंचा. समृद्ध इतिहास और कृषि विरासत के अद्भुत संगम वाले इस जिले के नौगढ़ ब्लॉक के पिकौरा चौराहा गांव में जैसे ही किसान कारवां पहुंचा, किसानों में खेती और पशुपालन से जुड़ी नई जानकारियां हासिल करने को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया और कृषि संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं. राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदियों की गोद में बसे सिद्धार्थनगर की भूमि कृषि के लिए अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है. यहां के किसान समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में बदलाव भी कर रहे हैं. धान (विशेषकर काला नमक) और गेहूं की पारंपरिक खेती के साथ अब किसान जैविक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं.
ऐतिहासिक धरोहर और हरित खेतों से समृद्ध इस जनपद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और उनका अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की. वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती के नए तरीकों और फसल प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की. कार्यक्रम में चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि ने कंपनी के उत्पादों की जानकारी देते हुए उर्वरकों के संतुलित और सही उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक किया. कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ के माध्यम से 12 किसानों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे किसानों में विशेष उत्साह देखने को मिला.
कार्यक्रम के पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र, सिद्धार्थनगर के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्रा ने किसानों को बताया कि किसान की थाली में सभी प्रकार के पोषक तत्वों का होना आवश्यक है. उन्होंने विस्तार से समझाया कि संतुलित पोषण किसानों को किस प्रकार प्राप्त हो सकता है. आगे उन्होंने अमरूद फल के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पोषण के मामले में अमरूद सेब के बराबर माना जाता है. साथ ही किसानों को अमरूद की बागवानी अपनाने के लिए जागरूक किया. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र के महत्व पर भी प्रकाश डाला और किसानों से कहा कि खेती से जुड़ी नई तकनीकों और वैज्ञानिक जानकारी को किसान केवीके के माध्यम से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.
दूसरे चरण में पशुपालन विभाग के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी नौगढ़ सदर डॉ. आर. बी. यादव ने किसानों को पशु एंबुलेंस सेवा के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इसके लिए 1962 नंबर टोल-फ्री जारी किया गया है, जिस पर किसान फोन करके अपने पशुओं का इलाज करवा सकते हैं. उन्होंने कहा कि मात्र 5 रुपये में किसान घर बैठे अपने पशु का इलाज करवा सकते हैं. यह सुविधा विशेष रूप से पशुओं की आपातकालीन स्थिति के लिए शुरू की गई है. आगे उन्होंने पशु बीमा योजना से संबंधित जानकारी भी किसानों को दी. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अब कृषि के अलावा पशुपालन के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सुविधा शुरू कर दी गई है, जिसके तहत बैंक द्वारा किसानों को 4 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराया जाता है. कार्यक्रम के दौरान पशुपालन अधिकारी ने सरकार द्वारा संचालित अन्य योजनाओं की जानकारी भी किसानों को दी.
तीसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि अरुण प्रताप सिंह ने किसानों को चंबल फर्टिलाइजर के उत्पाद उत्तम प्रणाम और उत्तम सुपरराइजा के महत्व और सही उपयोग को लेकर जानकारी दी. इसके साथ ही उर्वरक और रासायनिक उर्वरकों के सही उपयोग करने के बारे में किसानों को जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने फसलों में संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग को लेकर भी विस्तार से किसानों के बीच चर्चा की और बताया कि फसलों में कौन-कौन से पोषक तत्व इस्तेमाल करना चाहिए.
चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र सिद्धार्थनगर के मृदा विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार ने किसानों को खेती से आमदनी बढ़ाने के अलग-अलग उपायों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कई उदाहरणों के माध्यम से कृषि के अलग-अलग आय स्रोतों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि खेती में किसानों की सबसे अधिक लागत खाद पर आती है, इसलिए किसानों को रासायनिक उर्वरकों का उपयोग सही मात्रा, सही समय और वैज्ञानिक प्रबंधन के अनुसार करना चाहिए. आगे उन्होंने मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी. साथ ही किसानों को नियमित रूप से मिट्टी की जांच करवाने के लिए जागरूक किया.
पांचवें चरण में जादूगर सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को हर शुभ अवसर पर वृक्ष लगाने के लिए भी अपील की.
अंतिम छठवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरे विजेता गेना देवी रही, जिन्हें 2000 रुपये दिए गए. इसके साथ प्रथम विजेता सावित्री को 3000 रुपये की राशि दी गई. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
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