वॉटरशेड प्रोजेक्ट के जरिए 50 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित बनाना है. बारिश आधारित और सिंचाई जल की परेशानियों से जूझ रहे इलाकों की दिक्कत खत्म करने के लिए 56 नए वॉटरशेड प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है. यह बारिश के पानी को वॉटरशेड पानी को इकट्ठा करेंगे और फसलों की सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा इन प्रोजेक्ट के जरिए बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने, मिट्टी के कटान को रोकने, नए किस्म के पौधों की नर्सरी लगाने, चारागाह विकसित किए जाएंगे. केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि वॉटरशेड प्रोजेक्ट के जरिए 50 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित बनाना है.
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 56 नई वाटरशेड विकास परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है. इसके तहत 10 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में इन परियोजनाओं को 700 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया जाएगा. एजेंसी के अनुसार मंत्रालय ने कहा कि ये परियोजनाएं राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, असम, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम में शुरू की जाएंगी.
ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भूमि संसाधन विभाग ने 10 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में चल रही प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना यानी पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी 2.0 योजना के तहत 700 करोड़ रुपये की लागत से 56 नई वाटरशेड विकास परियोजनाओं को मंजूरी देने की घोषणा की है. बयान में कहा गया है प्रत्येक परियोजना का क्षेत्रफल लगभग 5,000 हेक्टेयर होगा, लेकिन पहाड़ी राज्यों में यह कम हो सकता है. इस पहल में लगभग 2.8 लाख हेक्टेयर को कवर करने के लिए 700 करोड़ रुपये आवंटित करके प्रत्यक्ष क्षेत्र प्रभावों को प्राथमिकता दी गई है, जिससे बंजर भूमि की समय पर वसूली और निधियों का कुशल उपयोग पक्का होगा.
बयान में कहा गया है कि नई वॉटरशेड परियोजनाएं किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होंगी. इसके अलावा भूमि क्षरण को रोककर जलवायु बदलावों के मद्देनजर लचीलापन लाने के प्रयासों को मजबूत करने में मदद करेंगी. मंत्रालय ने कहा कि डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 1.0 के तहत पूरी की गई वॉटरशेड परियोजनाओं के मूल्यांकन से भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार, सतही जल की उपलब्धता में वृद्धि, फसल उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार का पता चला है.
भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई) के वाटरशेड विकास घटक को लागू कर रहा है. इसका उद्देश्य एकसाथ वाटरशेड विकास परियोजनाओं को शुरू करके देश के बंजर और वर्षा आधारित क्षेत्रों को विकसित करना है. इसके तहत रिज क्षेत्र का ट्रीटमेंट, जल निकासी लाइन ट्रीटमेंट, मिट्टी और नमी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, नर्सरी उगाना, चारागाह विकास और रोजगार देना शामिल हैं.
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2021-22 में डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 के तहत 12303 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने वाली 1150 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. योजना के तहत पहले चरण में वॉटरशेड परियोजनाओं के लागू होने से उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए गए हैं.
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